तेरी याद – मेरी कविता
तेरी याद – मेरी कविता
सुनो दिकु…
आज जब तेरी खबर मुझ तक आई,
आँखें भीग गईं, रूह मुस्काई।
सुना — आज भी वही जज़्बा है,
दिकुप्रेम तेरे दिल में भी ज़िंदा है।
रोक रखा है तुझे वक़्त और क़समों ने,
तेरे फ़र्ज़ और रिश्तों ने।
तू चाहकर भी कुछ कह नहीं पाती,
पर तेरी ख़ामोशी मुझसे बात है कर जाती।
मैं आज भी तुझसे उतना ही प्यार करता हूँ,
तेरी ख़ुशी की हर रोज़ इबादत करता हूँ।
अगर कभी तन्हा लगे तुझको,
तो बस मेरी कविताओं को पढ़ लेना दिकु।
मेरे हर लफ़्ज़ में तेरा ही नाम लिखा है,
मेरी कलम ने तुझे ही हर शे’र में बुन रखा है।
मैं जी रहा हूँ बस इसी उम्मीद में,
कि मेरी कविता पढ़कर मुस्काए तू ज़ेहन में।
और हाँ…
मेरा प्यार अब भी सदा है तेरे लिए,
दिकु — वो पहले से भी ज़्यादा है तेरे लिए।

कवि : प्रेम ठक्कर “दिकुप्रेमी”
सुरत, गुजरात
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