तू महक जिंदगी में गुलाब की तरह
तू महक जिंदगी में गुलाब की तरह

तू महक जिंदगी में गुलाब की तरह

( Tu Mahak Jindagi Mein Gulaab Ki Tarah )

 

तू महक जिंदगी में गुलाब की तरह

मत जा तू बेवफ़ा से ज़नाब की तरह

 

हाँ अंधेरे तन्हाई के होगे यहां

गुम कहीं मत हो इस आफ़ताब की तरह

 

चाँद सी सूरत को हाँ लगेगी नजर

मत निकल घर से यूं बेहिज़ाब की तरह

 

मैं जो पढ़ता रहूँ शाइरी की जैसे

तू लबों पे ठहर जा ज़वाब की तरह

 

जिंदगी की सनम वो मुहब्बत बन जा

रोज़ तुझको पढ़ूं मैं क़िताब की तरह

 

इसलिए तो बनाना अपना  चाहता

हो जैसे फ़ूलों के तू शबाब की तरह

 

प्यार है ये सनम कोई पैसा नहीं

बात मत कर आज़म से हिसाब की तरह

 

❣️

शायर: आज़म नैय्यर

(सहारनपुर )

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