तुम्हारा साथ और तुम

तुम्हारा साथ और तुम

तुम्हारा साथ और तुम

मैंने हमेशा प्रयत्न किया,
अपने अनुराग को पारावार देने का,
एवं उसकी नीरनिधि में समाने का,
तुम्हारे चेहरे की आभा,
और उस पर आई
हँसी को
कायम रखने का,
किन्तु-
मैं हमेशा
नाकामयाब रही,
क्योंकि–
तुम मुझे एवं मेरे प्यार को
समझ ही नहीं पाये।
तुम मेरी
भावनाओं में लिप्त,
परवाह को
भांप न सके,
मालूम है कि-
हमेशा साथ संभव नही,
फिर भी मैंने हमेशा ढूंढ़ी तलाशी,
तुम्हारे साथ रुक जाने की
सम्भावनायें…
किन्तु-
मेरे हिस्से में आई-
केवल प्रतिक्षाएँ…
असीमित प्रत्याशाएँ…
अनगिनत परवशता….
अनेकों ऊहापोहता का वेग,
और अलगाव की वेदनाएँ…..
हाँ-
अगर नहीं आया तो
वह है,
‘तुम’ और ‘तुम्हारा साथ’ ।।

डॉ पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’

लेखिका एवं कवयित्री

बैतूल ( मप्र )

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • फ़र्क नहीं पड़ेगा | Poem fark nahi padega

    फ़र्क नहीं पड़ेगा ( Fark nahi padega )   बहुत सारी खामियां है मुझमें तो क्या हुआ……? तुमने कभी उन ख़ामियों को क्या मिटाना चाहा कभी….? नहीं ना…….!   तुम चाहते ही नहीं थे कभी कि हम भी उभर पाएं और तुम्हारे साथ खड़े हो सकें तुमने चाहा ही नहीं ऐसा कभी हम तुम्हारे साथ…

  • कृष्णा | Krishna par Kavita

    कृष्णा ( Krishna ) कारावास में जन्म लिए जो था उन्हीं का वंश कर्मों का फल भोगने को विवश था कृष्ण और कंश । बालापन में खूब खेलते करते थे खूब शरारत उम्र के साथ सीखाए करना रासलीला और महाभारत । राधा के पीछे खूब भागते वो था ना चरित्र हीन अदृश्य होकर लाज बचाए…

  • टूटे हुए सपने | Toote hue Sapne

    टूटे हुए सपने ( Toote hue sapne )   तोड़ता भी रहा जोड़ता भी रहा टूटे सपनों को मैं रात भर खुली आंख जब सहर हुई टुकड़े ही टुकड़े थे बचे सामने उम्र भीं काबिल न थी जोड़ पाने में बहत्तर छेदों की गुदड़ी थी मिली सिल सिल कर भी सिलते रहे जर्जर दीवारें भी…

  • नया साल : नयी आशाएं

    नया साल : नयी आशाएं ******* बीता यह वर्ष रे आया नववर्ष रे! झूमो ओ काका झूमो रे काकी रात अंतिम यह बाकी? नाचो ए बबलू नाचो ए बबली गाओ ना भैया गाओ ना भाभी बजाओ सब ताली सजाओ जी थाली? छोड़ो पटाखा करो धूम धड़ाका थिरकना जरा सा डिस्को जरा सा! है रात मतवाली…

  • समंदर बन जाए | Samandar shayari in Hindi

    समंदर बन जाए ( Samandar ban jaye )   आओ हम भी गीत कुछ ऐसे गाए दिल के जोड़े तार तराने बन जाए   सुहानी हो शाम महफिल सज जाए दरियादिल हो हम समंदर बन जाए   रिमझिम हो बारिश घटाएं छा जाए मदमाता हो सावन सुहाना आ जाए   ले गीतों की लड़ियां मधुरता…

  • मन | Kavita Man

    मन ( Man )   मत पूछो ये चंचल मन , भला कहां कहां तक जाएं कभी पुरानी यादों में झांके, कभी कही यूहीं खो जाएं ।। कभी अकेला ही मस्त रहें, कभी ये तन्हां महसूस करें कभी ढूंढे किसी का साथ कभी अलग थलग हो जाएं।। मत पूछो इस मन की तुम ये क्या…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *