उम्मीद

Ummeed Hindi Ghazal | Hindi Poem -उम्मीद

उम्मीद

( Ummeed )

 

 

चले आओ कशक तुममे अगर, थोडी भी बाकी है।

मैं  रस्ता  देखती रहती मगर, उम्मीद आधी   है।

 

बडा मुश्किल सा लगता है,तेरे बिन जीना अब मुझको,

अगर  तुम  ना  मिले  हुंकार तो  ये, जान  जानी  है।

 

बनी  मै  प्रेमिका  किस्मत  में  तेरे,  और  कोई  है।

मै  राधा  बन  गयी पर  रूक्मणि तो, और कोई है।

 

मै काजल बनके आँखो से बही हूँ, आसूंओ के संग,

मगर सिन्दूर  मांथे   पर  लगाये,  और  कोई  है।

 

बताओ  क्या कँरू जीना भी मरना,  लग रहा है अब।

मोहब्बत का दीया हाथों से छिनता, दिख रहा है अब।

 

नजर  दुनिया के तानों  का, बुरा  अन्जाम  लगता है,

चले आओ ना इस दिल का, बुरा अब हाल लगता है।

 

✍?

कवि :  शेर सिंह हुंकार

देवरिया ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें : 

समुन्दर खुमार का | Ghazal samundar khumar ka

Similar Posts

  • महर्षि वाल्मीकि | Maharishi Valmiki par Kavita

    महर्षि वाल्मीकि ( Maharishi Valmiki )   बुरे कर्मों को छोड़कर सत्कर्मों में लगाया ध्यान, साधारण इंसा से बनें महर्षिवाल्मीकि भगवान। देवलोक के देवर्षि मुनि नारद जी के यह शिष्य, प्रचेता के ये दसवें पुत्र और संस्कृत के विद्वान।। महर्षिवाल्मिकी जीवन से मिलती प्रेरणा हजार, जो कभी राहगीर को लूटकर भरा पेट परिवार। आदिकवि एवं…

  • हौसला मेरा अभी है बुलंद

    हौसला मेरा अभी है बुलंद मंजिल को पाना मेरी है पसंदहौसला मेरा अभी है बुलंदमेरा हौसला ही है मेरी मंजिलदुश्मन भी मेरा मुझे क्या मात देमेरे साथ है ईश्वर सदा मेरा साथ देरब साथ है परेशान मेरा क़ातिलभुजाओं में मेरी अब भी जोश हैअभी खोया नहीं मुझे होश हैरखुगां सदा अपना होश राह जटिलसत्य की…

  • हमारे शहर में | Hamare Shahar mein

    हमारे शहर में ( Hamare shahar mein )  ( 36) ‘हमारे शहर में’ प्रायः डाॅक्टर का बेटा डाॅक्टर है, वकील का बेटा वकील मास्टर का बेटा मास्टर है. इसी के अनुसार वधू भी तलाशते हैं , डाॅक्टर के लिए डाक्टरनी प्राथमिकता बताते हैं. कमाने वाली बहू सबकी पहली पसंद है , नकद दस लाख फार्चूनर…

  • बनना है तो दीपक बन | Deepak Ban

    बनना है तो दीपक बन ( Banna hai to deepak ban )    अगर बनना है तो दीपक बन, दिल जीतना है तो बाती बन। छू ही, लेते वह चाॅंद और तारें, भाव हो जिसके प्यारे ये मन।। जब ये जलता प्रकाश करता, लेकिन स्वयं अन्धेरे में रहता। दीपक से है यह बाती महान, जलती…

  • हुई पस्त मैं | Past Hui Main

    हुई पस्त मैं ( Past Hui Main ) आज शोर कोई कहीं जरा नहीं करो, मेरे दिल में भयंकर तूफान आया है। देखो अतीत की प्रीत चादर उड़ गई, याद बनकर प्रेमिल मेहमान आया है। किया पहले-पहल निगाहों पर वार, दूसरा चातुर्य करता बात व्यवहार। धक-धक की आवाज निरंतर सुनती, जब-जब होती आँखों से आँखें…

  • मै शिक्षक हूं | Main Shikshak Hoon

    मै शिक्षक हूं ( Main Shikshak Hoon ) शिक्षक बनके एक सुसंस्कृत समाज बनाना चाहती हूं मैं ज्ञान की पूंजी देकर योग्य मानव बनाना चाहती हूं मैं समाज में आत्मविश्वास का दीप जलाकर मुश्किलों से लड़ना सिखाती हूं मैं मन क्रम वचन से बाती बन खुद जलकर ज्ञान का प्रकाश फैलाना चाहती हूं मैं कोरे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *