वाणी और पानी -ध्रुव-2

वाणी और पानी – ध्रुव-2


वह ठीक उसी तरह
असंयमित बहते हुए
पानी से बाढ़ की
त्रासदी, भूस्खलन
आदि जैसे प्राकृतिक
आपदाएं आ जाती है
वह गांव कस्बे सब जल
समाधि में विलीन हो जाते हैं
और साथ में धन–जन आदि
की भी भारी क्षति होती है
इसलिए यह जरूरी है
कि पर्यावरण का संतुलन
सही से बनाए रखें और
असंयमित बहते हुए
पानी और बिना
विचारे बोली वाणी
दोनों पर संयमित
और विवेक
होना जरूरी है
सन्तो की वाणी
सबको लगती प्यारी
वह बातों में छिड़
जाता युद्ध महाभारत
बात ही बात में बन
जाती बिगड़ी बात भी
मीठी हो पर हो न बू
चापलूसी या मिथ्या की
आवश्यक और
अनावश्यक का रहे
ख़याल और खोले
जबान अपनी संभाल कर ।

प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़)

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