विष प्याला

Hindi Poetry | Hindi Kavita | Hindi Poem -विष प्याला

विष प्याला

( Vish Pyala )

 

क्रूर हृदय से अपनों ने, जीवन भर  दी  विष प्यालों में।
जबतक आग को हवा दी तबतक,शेर जला अंगारों में।
कोमल मन के भाव  सभी, धूँ  धूँकर तबतक  जले मेरे,
जबतब प्रेम हृदय से जलकर,मिट ना गया मन भावों से।

 

**
नगमस्तक भी रहा तभी तक, जबतक मन में प्रीत रहा।
क्रूर थे मन के भाव सभी के , जाना तब मुझे तीर लगा।
सारे  दृश्य  उभर  नयनों  में,  छल के राज खोलते अब,
बात  समझ  में आई  तबतक,  शेर  बिका   भंगारों  में।

 

**
क्रोध नयन से फूट पडे, प्रतिशोध की ज्वाला धँधक उठी।
समर  भूमि  में खडा पार्थ सा,  अपनों  से  मन विरत हुई।
क्या  मै  विष को पीकर के ,शिव शम्भू का गुणगान करू,
या  फिर  सारे  मोह  त्याग  कर, जैन मुनि सा ध्यान धरू।

 

**
या  मै  योगी  बन  कर  भटकू, नटवर  नागर मीरा  सा।
या  कौटिल्य  बनू  हे  राघव,  नाश  करू घन नन्दों  का।
जलता  मन  तन  तपता  मेरा, भाव भी  लहू लुहान हुए,
नयनों से नीर रस  बरसते  ऐसे,  जैसे ज्वाला  फूट  पडे।

 

✍?

कवि :  शेर सिंह हुंकार

देवरिया ( उत्तर प्रदेश )

??शेर सिंह हुंकार जी की आवाज़ में ये कविता सुनने के लिए ऊपर के लिंक को क्लिक करे

यह भी पढ़ें : 

Hindi poem on Bazaar | Hindi Kavita -बाजार

 

 

Similar Posts

  • आज भी बेटियाँ | Kavita Aaj Bhi Betiyan

    आज भी बेटियाँ ( Aaj Bhi Betiyan )   सिल बट्टा घिसती है, खुद उसमे पिसती है, बूँद बूँद सी रिसती है, मगर फिर भी हँसती, आज भी बेटियाँ गाँव शहर में….!! नाज़ो से पलती है, चूल्हे में जलती है, मनचाही ढलती है, फिर भी ये खलती है, आज भी बेटियाँ गाँव शहर में ….!!…

  • निजी आजादी | Niji Zindagi

    निजी आजादी ( Niji zindagi )    गलत को गलत यदि कह न सको तो गलत का साथ भी गलत ही होगा स्वयं को निर्दोष समझने से पहले अपनी भूमिका भी माननी होगी… दुनियां के उसूलों के साथ चलना स्वयं को गुलाम बना लेना है विशिष्टता मे लोग अलग कुछ नही करते ढंग ही उनका…

  • वृंदावन | Vrindavan

    वृंदावन ( Vrindavan )   मुरली मनोहर बजाई बृंदावन में धूम मचाई राधे कृष्णा की जोड़ी बृज को प्रेम गाथा बतलाई ।। गोकुल ग्वाला कान्हा मेरा राधे बरसाने की छोरी रे नंद के आनंद भयो था बृषभान की किशोरी थी ।। एक दूजे से प्रेम था जिनको दया,करुणा कृपा सब बतलाई! न पाना ,न खोना…

  • बसंत के बहार में | Basant ke Bahar Mein

    बसंत के बहार में ( Basant ke bahar mein )   हवा चली पत्तियां चलीं पेड़ भी थिरकने लगें प्रकृति मदहोश थी बसंत के बहार में प्यार का प्रथम बार अंकुरण जब हो रहा था कण-कण धड़क रहे थे प्यार के इजहार में हर्ष था उल्लास था प्रेम और विश्वास था धड़कनों में चाह थी…

  • आँसू | Aansoo par kavita

    आँसू! ( Aansoo )   हजारों किस्म के देखो होते हैं आँसू , जुदाई में भी देखो गिरते हैं आँसू। तरसते हैं जवाँ फूल छूने को होंठ, ऐसे हालात में भी टपकते हैं आँसू। बहुत याद आती है दुनिया में जिसकी, आँखों से तब छलक पड़ते हैं आंसू। तबाही का मंजर जब देखती हैं आँखें,…

  • शिव आरती | Shiva Aarti

    शिव आरती ( Shiva Aarti )    ओम जय डमरूधारी, तेरी महिमा अतिभारी। मात -पिता तू मेरे, मात-पिता तू मेरे, आया तेरे द्वारी। ॐ जय डमरूधारी… (2) श्वेताम्बर, पीताम्बर सोहे अंग तेरे, शिव सोहे अंग तेरे। भांग, धतूर ही लाया, भांग, धतूर ही लाया और न कुछ मेरे। ओम जय डमरूधारी…. ओम जय डमरूधारी, तेरी…

2 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *