Tag: Hindi Poem

  • तिनकों के उस गछी महल में | Hindi poem

    तिनकों के उस गछी महल में  ( Tinkon ke us gachi mahal mein )   सुबह एक दिन अपने घर में छत के एक अलग कोने में एक घोंसला सजा सलोना तिनकों के ताने बाने में   मां की ममता का न्योछावर देखा मानो रसखानों में, मां लाती चुग चुग कर दाना बिखरे फैले मैदानों…

  • वैराग्य | Vairagya kavita

    वैराग्य ( Vairagya )   सांसारिक जीवन से विरक्ति वैराग्य जब जागे हृदय  के  सारे  अंधकार  दुर्गुण दोष सब भागे   बने वैरागी राजा भर्तृहरि राजपाट दिया त्याग तप योग साधना कर हुआ हरि भजन अनुराग   गौतम बुद्ध वैराग्य जागा जन्म मरण गए जान खूब  तपस्या  करके वन में महात्मा हुये महान   साधु-संत…

  • प्यार का तोहफा | Hindi poem pyar ka tohfa

    प्यार का तोहफा ( Pyar ka tohfa )   जो हो दिलदार खास उनका स्वागत कीजिए दिल खोल खुशियां बांटो प्यार का तोहफा दीजिए   महक उठे मन का कोना सबको खुशियां दीजिए प्यार की खुशबू महकेगी हर पल महसूस कीजिए   चार दिन की जिंदगी पल पल जी लीजिए हंसी खुशी से जीवन आनंद…

  • यौवन | Yauvan kavita

    यौवन ( Yauvan : Kavita )     अंग अंग भरी जवानी मन ही मन इठलाता यौवन मादकता के रंग बिखेरे मदमाता बल खाता यौवन   बहती सरिता सी अंगड़ाई फूलों सा महकता यौवन उन्मुक्त उड़ान भरे जवानी स्वप्न सुनहरे हो अंतर्मन   सागर सी उमंगे उठती भाव भरी बहती धाराएं मंद मंद मुस्काता यौवन…

  • मकानों में रख लिया | Dr. Kaushal Kishore Srivastava poetry

    मकानों में रख लिया ( Makano me rakh liya )     था जिन दियो में तेल मकानों में रख लिया । खाली दियो को तुमने मचानों में रख दिया ।।     उत्तर  थे  मेरे पास तुमने छीन सब लिया । फिर मुझको सवालो के निशानों पे रख दिया ।।     छीनी किसानों…

  • मैं कविता की हूंकारो से | Kavita

    मैं कविता की हूंकारो से ( Main kavita ki hunkaro se )     मैं कविता की हूंकारो से, गगन उठाया करता हूं। सोया सिंह जंगल का राजा, शेर जगाया करता हूं।   मात पिता गुरु की सेवा का, धर्म बताया करता हूं। अतिथि देवन हमारे, सम्मान जताया करता हूं।   शब्दाक्षर से अल्फाजों में,…

  • कहां अब पहले से त्यौहार | Tyohar kavita

    कहां अब पहले से त्यौहार ( Kahan ab pehle se tyohar )     कहां अब पहले से त्यौहार रहा ना अपनापन प्यार बड़ों का होता सम्मान लुप्त हो रहे सभी संस्कार   सद्भावों की बहती गंगा घट घट उमड़ता प्यार बहन बेटी बुजुर्गों का होता तब आदर सत्कार   अतिथि को देव मानते पत्थर…

  • मनभावन कविता | Manbhavan kavita

    मनभावन कविता ( Manbhavan kavita )     साहित्य विधाएं मधुरम कवि की कविताएं मधुरम उर पटल आनंद भरती मनभावन रचनाएं मधुरम   शब्द सुरीले मीठे-मीठे बहती भाव सरितायें मधुरम छंद सोरठा गीत गजल में सजे नई उपमायें मधुरम   कल्पनायें साकार होती सृजन भरी रचनाएं मधुरम भाव सिंधु से मोती बहते काव्य की धाराएं…

  • कुम्हार | Kumhar kavita

    कुम्हार ( Kumhar )   बाबू ले लो ना दिए घर तेरा रोशन हो जाएगा। एक वक्त की रोटी के लिए मेरा चूल्हा भी जल जाएगा। मेरी भूख तब मिटेगी जब तेरा हर कोना जगमग आएगा। ले लो ना बाबू जी कुछ दिए मेरा चूल्हा भी जल जाएगा। छोटे बड़े दीपक से अंधकार मिट जाएगा…

  • दीप जलाए प्रेम के | Kundaliya chhand

    दीप जलाए प्रेम के ( Deep jalaye pyar ke : kundaliya chhand )   दीप जलाए प्रेम के,पावन है अति पर्व। अनुरंजन वंदन करें,आज सभी को गर्व।   आज सभी को गर्व,जगत फैला उजियारा। बढ़े  परस्पर  प्रेम, बढ़ाएं  भाईचारा।   लक्ष्मी  देव  गणेश, आरती  मंगल  गाये। खुशियां मिले अपार ,प्रेम के दीप जलाये।     …