Wafadar Shayari

वफ़ादार नहीं थे | Wafadar Shayari

वफ़ादार नहीं थे

( Wafadar nahi the ) 

बहर-मफऊल -मुफाईल-मुफाईल-फऊलुन

 

कुछ दोस्त हमारे ही वफ़ादार नहीं थे
वरना तो कहीं हार के आसार नहीं थे

ख़ुद अपने हक़ों के हमीं हक़दार नहीं थे
हम ऐसी सियासत के तलबगार नहीं थे

झुकने को किसी बात पे तैयार नहीं थे
क्यों हम भी ज़माने से समझदार नहीं थे

हर ज़हर पिया हमने मुहब्बत का ख़ुशी से
उन पर तो ये भी रंग असरदार नहीं थे

करते भी ज़माने से भला कैसे शिकायत
जब वो ही मुहब्बत में वफ़ादार नहीं थे

कुछ दिल की ख़ताएं थीं तो साज़िश कहीं उनकी
हम सिर्फ़ अकेले ही ख़तावार नहीं थे

यह सोच लिया हमने भी उस हार से पहले
हर बार हमी जीत के हक़दार नहीं थे

सुनते हैं ज़माने की इनायत है उन्हीं पर
जो लोग कभी साहिबे-किरदार नहीं थे

चूमा है फ़लक चाँद सितारों को उन्होंने
जो लोग मुहब्बत में गिरफ़्तार नहीं थे

बाज़ारे-मुहब्बत का ये आलम है कि तौबा
ज़रदार हज़ारों थे खरीदार नहीं थे

इक हम ही ग़ज़ल तुझको सजाने मेंं लगे हैं
क्या और जिगर मीर से फ़नकार नहीं थे

साग़र यूँ हमें शौक से सुनता है ज़माना
हम कोई गये वक़्त की सरकार नहीं थे

 

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003
यह भी पढ़ें:-

ऊँची उड़ानों के थे | Unchi Udaano ke the

 

Similar Posts

  • इक इक करोड़ के | Emotional Heart Touching Shayari

    इक इक करोड़ के ( Ek ek crore ke )    वो अश्क हर नज़र में थे इक-इक करोड़ के दामन सजा रहा था कोई दिल निचोड़ के शाम-ए-फ़िराक़ में ये बहुत काम दे रहा तुम जामे-ग़म गये जो मिरे नाम छोड़ के करता है बात वो तो बड़ी एहतियात से लफ़्ज़ों को तोड़ के…

  • प्यार की पहल | Pyar ki Pahal

    प्यार की पहल ( Pyar ki pahal )   आसमां में खिला कँवल कहिए चाँद पर आप इक ग़ज़ल कहिए जो बढ़ा दे फ़िजा मुहब्बत की प्रेयसी के नयन सजल कहिए बाँध दे जो नज़र से धड़कन को प्यार की आप वो पहल कहिए बो दिया नब्ज़ मे दर्द-ए-कसक प्रेम की बढ़ गई फसल कहिए…

  • पयमाना हमारे आगे

    पयमाना हमारे आगे लाइये साग़रो-पयमाना हमारे आगेछोड़िये आप ये शर्माना हमारे आगेहुस्ने-मतला — क्या पियेगा कोई पयमाना हमारे आगेअब भी शर्मिंदा है मयखाना हमारे आगे हमने हर रुख से ज़माने का चलन देखा हैसोच के कहियेगा अफ़साना हमारे आगे रोक क्या पायेंगे राहों के अंधेरे हमकोशम्अ रौशन है फ़कीराना हमारे आगे हम वफ़ादार हैं उल्फ़त…

  • क्या कहूँ | Kya Kahoon

    क्या कहूँ क्या कहूँ दिल ने मुझे उल्फ़त में पागल कर दियाथोड़ा में पहले से था उसने मुकम्मल कर दिया अपनी आँखों का सनम तूने तो काजल कर दियाआँख से छूकर बदन को तूने संदल कर दिया शह्र में चर्चे बड़े मैला ये आँचल कर दियाक्या कहें दिल रूह को भी मेरी घायल कर दिया…

  • आशना होता | Ashna Hota

    आशना होता ( Ashna hota )    अगर मेरी हक़ीक़त से ज़रा भी आशना होता यक़ीनन तू भी मेरे रंग ही में ढल गया होता लुटा देता मैं अपनी ज़िन्दगी की हर ख़ुशी तुझ पर मुहब्बत से मुझे अपना कभी तो कह दिया होता ग़ुरूर-ओ-नाज़ नखरे गर दिखाना छोड़ देते तुम हमारे प्यार का आलम…

  • उनकी चाहत में | Unki Chahat Mein

    उनकी चाहत में ( Unki Chahat Mein ) इश्क़ में जब से वो कबीर हुएउनकी चाहत में हम सग़ीर हुए कोई तुम सा नहीं है जाने जाँइश्क़ में तुम तो यूँ नज़ीर हुए उठ के ताज़ीम अब वो करते हैंजिनकी नज़रों में हम हक़ीर हुए तिश्नगी मेरी बुझ न पाई कभीचाहे कितने ही आब गीर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *