Waqt poem in Hindi

वक्त नहीं लोगों के दामन में | Waqt poem in Hindi

वक्त नहीं लोगों के दामन में

( Waqt nahi logon ke daman mein )

 

 

वक्त नहीं लोगों के दामन में, भागमभाग है सारी।
महंगाई ने पैर पसारे, डरा रही हमें नित महामारी।

 

चकाचौंध दिखावा ज्यादा, वादे प्रलोभन सरकारी‌।
आटा दाल आसमान छूते, बीत रही जिंदगी सारी।

 

दिनभर की दौड़ धूप से, दो जून की रोटी पाते हैं।
कमर तोड़ महंगाई में, नित खून पसीना बहाते हैं।

 

वक्त नहीं लोगों के दामन में, मीठी बातें चार करें।
बैठ थोड़ा वक्त बिताएं, मधुर स्नेह व्यवहार करें।

 

सुख-दुख औरों का पूछे, हाल बयां करें खुद का।
दुनिया का आलम ऐसा, माहौल लगा करें युद्ध सा।

 

भागदौड़ भरी जिंदगी, सुध-बुध ना ठिकाना कोई
कई किनारे पीछे छूटे, पथ में नहीं बेगाना कोई।

 

   ?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

कवि की दुनिया न्यारी है | Geet kavi ki duniya nyari hai

Similar Posts

  • मजबूरी/ लाचारी | Kavita

    मजबूरी/ लाचारी ( Majboori )   सबको रखना दूरी है यह कैसी मजबूरी है कालचक्र का कैसा खेल कोई शक्ति आसुरी है   मजदूर आज मजबूर हुआ थककर चकनाचूर हुआ लहर कोरोना कैसी आई अपनों से भी दूर हुआ   मजबूर आज सारी दुनिया मुंह पर मास्क लगाने को सावधान रहकर जग में डटकर कदम…

  • बीएल भूरा की कविताएं | BL Bhura Poetry

    युवा पीढ़ी आज का भविष्य है उनके कंधों पर समाज की उम्मीदें हैं।उनके सपनों को पूरा करना हमारा कर्तव्य है। युवाओं में ऊर्जा और उत्साह का संचार है,वे समाज को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं।उनके पास समाज की समस्याओं का समाधान है। युवा पीढ़ी आज की सबसे बड़ी ताकत है,वे समाज को आगे…

  • प्रेयसी | Preyasi

    प्रेयसी ( Preyasi )    सृष्टि में  संचरित अथकित चल रही है। प्रेयसी ही ज्योति बन कर जल रही है।।   कपकपी सी तन बदन में कर गयी क्या, अरुणिमा से उषा जैसे डर गयी क्या, मेरे अंतस्थल अचल में पल रही है।। प्रेयसी०   वह बसंती पवन सिहरन मृदु चुभन सी, अलक लटकन नयन…

  • नववर्ष | Poem in Hindi on New Year

    नववर्ष नई उम्मीदें लिए हुए आ रहा नूतन नववर्ष, हर्षोल्लास की मधुर तरंगे करती हृदय स्पर्श। इस अवसर पर आओ मिलजुल खुशियां मनाएं, नव वर्ष का स्वागत करें हम सब बाहें फैलाएं। बीत रहा जो वर्ष उसके रंजो गम छोड़िए, आने वाले नववर्ष के स्वागत की सोचिए। गुजरा हुआ साल चाहे कैसा भी रहा हो,…

  • Hindi Kavita On Women -नारी

    नारी ( Nari Kavita )   नर से धीर है नारी … घर में दबी बेचारी , कभी बेटी कभी बहू बने , कभी सास बन खूब तने, एक ही जीवन कितने रूप , धन्य भाग्य तुम्हारी नर से धीर है नारी… कभी यह घर अपना , कभी वह घर अपना जिस घर जाए वहीं…

  • आस्था में ही विश्वास है | Aastha Mein Vishwas

    कंचन काया राम की , नयन कमल समान दर्शन करती दुनियां,करती प्रभु को प्रणाम ।। मूर्तिकार ने जब यह मूर्ति बनाई तब उसका स्वरूप उसे इस प्रकार का बिल्कुल नहीं लगा जैसे उसमें कोई ऊर्जा समाहित हो परंतु प्राण प्रतिष्ठा के बाद राम का स्वरूप और निखार एकदम से अलग हो गया हमारे वेद मन्त्रों…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *