Watan ke Liye

जान देंगे हमेशा वतन के लिये | Watan ke Liye

वतन के लिये

( Watan ke liye )

 

जान देंगे हमेशा वतन के लिये ?
हम जीयेंगे यूं ही इस चमन के लिये

देश ने दी है तहजीब ऐसी हमें
सर झुकेगा सदा इस नमन के लिये

सैनिको के लिये जीत का जश्न है
रौनके है नहीं अंजुमन के लिये

सरहदों पर करे है हिफ़ाज़त सबकी
ख़त लिखा है उसने उस सजन के लिये

सरहदें पार करने न देंगे कभी
हर अदू से लड़ेंगे वतन के लिये

इसलिये झंडे को मैं करता हूँ सलाम
हूँ दीवाना इसके बांकपन के लिये

बस यही मेरी ख़्वाहिश है आज़म सदा
सर झुके ये वतन को नमन के लिये

शायर: आज़म नैय्यर
(सहारनपुर )

यह भी पढ़ें :-

जान से प्यारा वतन | Jaan se Pyara Watan

Similar Posts

  • हो गई खता यूँ ही | Khata Shayari

    हो गई खता यूँ ही ( Ho gayi khata yoon hi )   हो गया कितना बावला यूँ ही आँख से हो गई खता यूँ ही लोग मिलते रहे जुदा भी थे साथ में चलता काफिला यूँ ही याद फिर रोज वो लगे आने पहले जिनको भुला दिया यूँ ही चाह थी गर तो कह…

  • Hindi Ghazal Poetry | काम किया हर पल पेचीदा

    काम किया हर पल पेचीदा ( Kaam Kiya Har Pal Pechida )     काम किया हर पल पेचीदा खुशियाँ देकर दर्द ख़रीदा   दूर गये हो जिस दिन से तुम रहता हूँ तब से संजीदा   जब देखा मज़हब वालों को टूट गया हर एक अक़ीदा   कैसे ख़ुश रह पाऊँ बोलो ? कोई…

  • दिल में शोले उठे हैं यहां | Dil Chune wali Shayari

    दिल में शोले उठे हैं यहां ( Dil mein shole uthe hai yahan )    इश्क में लुट चुके है यहां दिल में शोले उठे हैं यहां घेर ली है ज़मीं कांटों ने फूल कब खिल सके हैं यहां सब फरेबी निकलते हैं लोग सोच से सब परे हैं यहां दौलतें शोहरतें देखकर लोग इज़्ज़त…

  • खामोशी | Khamoshi Shayari

    खामोशी ( Khamoshi )    नहीं कुछ भी है कहने को तो ओढ़ी आज खामोशी ज़रा सुनिए तड़पते दिल की है आवाज़ खामोशी। समंदर सी है गहरी जलजले कितने समेटे है छुपाए है हज़ारों ग़म हज़ारों राज़ खामोशी। नहीं लब से कहा उसने मगर सब कुछ बयां करती वो उसका हाले दिल बदले हुए अंदाज़…

  • हम से | Ghazal Hum Se

    हम से ( Hum Se ) मुदावा इस ग़म-ए-दिल का किया जाता नहीं हम से। तुम्हारे बिन किसी सूरत जिया जाता नहीं हम से। दबे लफ़्ज़ों में ले लेते हैं अक्सर ग़मज़दा हो कर। तुम्हारा नाम भी खुल कर लिया जाता नहीं हम से। जो तुम आकर पिलाओ तो ख़ुशी से पी के मर जाएं।…

  • छोड़ दे ऐब को

    छोड़ दे ऐब को छोड़ दे ऐब को, तख़सीस ,दुआ तू रख लेअपने असलाफ़ के अख़लाक़ की तू बू रख ले तू सलीके से पहुँच जाए बुलंदी पे भीख़ार दे गुल के मुझे और तू ख़ुशबू रख ले है फ़रेबी ये जहाँ लोग तमाशाई भीमत बिफर नादां तू गुस्से पे भी काबू रख ले मिल…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *