Aaya Budhapa

आया बुढ़ापा ले मनमानी | Aaya Budhapa

आया बुढ़ापा ले मनमानी

( Aaya budhapa le manmani ) 

 

बचपन बीता गई जवानी आया बुढ़ापा ले मनमानी।
ना रही वो चुस्ती फुर्ती सारी बीती बातें हुई कहानी।

मंद पड़ी नैनों की ज्योति श्वेत केश जर्जर हुई काया।
बच्चे बड़े हुए पढ़ लिखके सबको घेर चुकी है माया।

अकेले अकेले कोने में बैठा काशीराम भी कांप रहा‌
न जाने कब दस्तक देती मौत की आहट भांप रहा।

आज बुढ़ापे की लाठी की महसूस हुई दरकार यहां।
अकेलापन मन को कोसे टूट चुका है घर बार यहां।

ऊंचे सपने ऊंचे ओहदे औलाद बुलंदियों को छुए।
सब कुछ होकर खाली क्यों इस पड़ाव पे हम हुए।

बुढ़ापा बीमारी का घर कदम फूंक फूंक कर रखना।
हंस हंस कर जीवन काटो प्रेम लुटाकर रस चखना।

नैनो से बरसे नेह धारा अधर बरसाए प्रेम प्यारा।
तुम सबके हो जाओ फिर आएगी सुख की धारा।

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

मन वृंदावन हो जाए | Man Vrindavan ho Jaye

Similar Posts

  • जाऊँ क्यों मैं घूमने

    जाऊँ क्यों मैं घूमने ( कुण्डलिया ) जाऊँ क्यों मैं घूमने, सारे तीरथ धाम।कण-कण में हैं जब बसे, मेरे प्रभु श्री राम। मेरे प्रभु श्री राम, बहुत हैं मन के भोले।खाये जूठे बेर, बिना शबरी से बोले। सच्ची हो जो प्रीत, हृदय में तुमको पाऊँ।तुम्हें ढूंढने और, कहीं मैं क्यों कर जाऊँ। डाॅ ममता सिंहमुरादाबाद…

  • कैसे भरेंगे जख्म | Pollution poem in Hindi

    कैसे भरेंगे जख्म? ( Kaise bharenge zakhm )   ये घाटी, ये वादी, सब महकते फूलों से, काश, ये आसमान भी महकता फूलों से। फूलों से लदे मौसम ये मटमैले दिख रहे, समझ लेते प्रकृति का असंतुलन,फूलों से।   कंक्रीट के जंगल में अमराइयाँ न ढूंढों, लकड़हारे भी जाकर सीख लेते फूलों से। कटे जंगल,…

  • Hindi Poetry On Life | Hindi Poem -अंतर्द्वंद

    अंतर्द्वंद ( Antardwand ) ** लौट आई हैं वो जाकर, धूल धूसरित बदहवास चौखट खड़ी निराश अचंभित घरवाले सभी और नौकर चाकर। प्रश्न अनेक हैं मन में लगी आग है तन में क्या कहूं? क्या करूं सवाल? हो जाए न कुछ बवाल! सोच सभी हैं खामोश, फिर स्वागत का किया जयघोष। पहले अंदर आओ! जा…

  • धिक्कार | Dhikkar

    धिक्कार! ( Dhikkar )    सिसक रही क्यों ममता मेरी हाहाकार मचा है क्यों उर मेरे नारी होना ही अपराध है क्या क्यों सहती वह इतने कष्ट घनेरे पली बढ़ी जिस गोद कभी मैं उसने भी कर दिया दान मुझे हुई अभागन क्यों मैं बेटी होकर तब पूज रहे क्यों कन्या कहकर नारी ही नारायणी…

  • उम्मीदों का दामन | Umeedon ka Daman

    उम्मीदों का दामन ( Umeedon ka daman )   उम्मीदों का दामन यूं कभी ना छोड़िए। उम्मीद पे दुनिया टिकी मुंह ना मोड़िए। आशाओं के दीप जला खुशियां पाईए। प्यार के अनमोल मोती जग में लुटाइए। हारकर जो थक चुका हौसला बढ़ाइए। बढ़कर जरा थामिए हमें यूं ना गिराइए। मिलने को है आतुर थोड़ा शीघ्र…

  • हक की बात | Haq ki Baat

    हक की बात ( Haq ki Baat ) पत्थर के सब देवता, पत्थर के जो लोग। होते सौरभ खुश तभी, चढ़ जाता जब भोग।। देकर जिनको आसरा, काटा अपना पेट। करने पर वो हैं तुले, मुझको मलियामेट।। टूटे सपना एक तो, होना नहीं उदास। रचे बढ़े या फिर करे, कोई नया प्रयास। अपने हक की…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *