Yoga par kavita

योग विश्व को भारत की देन | Yoga par kavita

योग विश्व को भारत की देन

( Yoga vishwa ko bharat ki den )

 

योगी ऋषि-मुनियों ने,
जग को योग सिखाया।
तपस्या के दम पर,
योग शिक्षा दे गए।

 

अपना भारत देश,
दुनिया में है विशेष।
संसार को योग शिक्षा,
योगी संत दे गए।

 

अनुलोम विलोम हो,
प्राणायाम आसन हो।
स्वस्थ तन मन हो,
सीखा जग को गए।

 

शीर्षासन ताड़ासन,
वज्रासन योग करो।
भुजंगासन शक्ति का,
भंडार वो दे गए।

 

?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :- 

वृद्धाश्रम | Bridhashram Chhand

 

Similar Posts

  • जय-जय मतदाता | Kavita Jay Jay Matdata

    जय-जय मतदाता (  Jay Jay Matdata )   जय-जय मतदाता, पढ़ उनका बही-खाता, नेता होते सयाने, नेता होते सयाने, तू देश का निर्माता…..जय-जय मतदाता.. जय-जय मतदाता, पढ़ उनका बही-खाता, नेता होते सयाने, नेता होते सयाने, तू देश का निर्माता…..जय-जय मतदाता.. चाटुकारिता, लालच से फिर देखो तुम बचना, देश की हो तुम ताकत,देश की हो तुम…

  • पर्यावरण बचाना है

    पर्यावरण बचाना है पर्यावरण बचाना है तो , पीपल, बरगद, नींम लगाएं ! तपती धरती को अपने हम, आवर्षण से मुक्ति दिलाएं !! जाड़ा, गर्मी, बरसात और ऋतु चक्र सही हो जाएगा ! रोग दोष से मुक्ति मिलेगा, घर खुशियों से भर जाएगा !! पर्यावरण संतुलित होगा, धरती हरी भरी होगी ! लहराएंगी फसलें चहुंदिश,…

  • शिरोमणि महाराणा प्रताप | Maharana Pratap veer ras Kavita

    शिरोमणि महाराणा प्रताप ( Shiromani Maharana Pratap )   जेष्ठ मास शुुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाते जयंती लिया जन्म महाराणा ने कुंभलगढ़ के दुर्ग में उदय सिंह  पिता थे उनके तो जयवंत कबर माता थी वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप पौत्र राणा सांगा के चेतक था प्रिय घोड़ा उनका कवच पहन 72 किलो का हाथ…

  • बदगुमानी के धागे | Badgumani ke Dhage

    बदगुमानी के धागे ( Badgumani ke Dhage )   बदगुमानी के कुछ धागे गुथे-गुथे स्मृतियों के मोती बिखरे हुए जैसे किसी मियाद के किसी पृष्ठ में रखा सूखा गुलाब कोई अतीत-सा प्रतिचित्र कुछ चंद नज़्म कहीं रूठी-सी आधी अधूरी-सी। अनायास लिखते-लिखते कहीं से कोई सदा मन के शांत कोने में गुजर जाती है। ये तन्हा-सा…

  • जेठ की दुपहरी | Jeth ki Dupahari

    जेठ की दुपहरी ( Jeth ki Dupahari )   तू चलना मत छोड़ना, आगे बढ़ना मत छोड़ना। सफलता मिले या ना मिले, पीछे मुड़कर कभी ना देखना।। तू परेशानियों से ना घबरा, जेठ की दुपहरी से मत कतरा। डगमगा मत अपनें पाँवो से, दौड़ता चल अपनी रफ्तार से।। तू दौड़ में प्रथम भले ही ना…

  • रंग | Daisy Chain Poem in Hindi

    रंग ( Rang )    विधा: डेजी चैन   रंग रंगीला फागुन आया आया मधुमास महकता महकता रहा चमन सारा सारा समां झूमा खुशियां पा पा लेना मुस्कानों के मोती मोती से शब्द अनमोल अनमोल है बड़ों का प्यार प्यार भरे दो बोल मीठे मीठे मीठे रसीले गाल गोरी तेरे तेरे संग खेलूं सजनी होली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *