योग पर रचित दोहे

योग पर रचित दोहे

मन लगाकर योग करें,जीने की है कला।
मजहब से ऊपर योग,होगा सबका भला।

सूरज को करना नमन,ये योगों का सार।
तनाव मुक्त होंगे सब,मिला हमें उपहार।।

मिट जाएगी थकावट,मिलता है आराम।
दुनिया की पहचान है,बने योग से काम।।

वजन घटाए आपका,रोज करेंगे योग।
संकल्प सबको लेना,मेरा यह अनुरोध।।

करे योग – रहे निरोग,सेहत का है राज।
न आएगी काम दवा,योग करोगे आज।।

योग को अपनाएगा,कभी दवा न खाए।
वह सुखी कहलाएगा,सेहत भी बनाए।।

जन-जन की पहचान है,दूर भगाए रोग।
जीवन में उपयोग है,करना सबको योग।।

सभी पहले ध्यान करें, करें योग अभ्यास।
मन का मयूर नाचता,सुख का है एहसास।।

न होंगे कभी बीमार,सरल-सहज है योग।
मिले सफलता खेल में,योग करे सहयोग।।

योग करें-निरोग रहे,सबको रखना ध्यान।
योग को अपनाऍंगे, बन जाएगा बलवान।।

आती है नव – चेतना,उमर बढ़ा दे योग।
थोड़ा समय निकालिए,करता योग निरोग।।

आलस को हम त्याग दे,योग को अपनाए।
योग साधना हम करें,भोजन भी पच जाए।।

बात हमारी मानिए,पहले करना ध्यान।
न होंगे कभी बीमार,बनेगा पहलवान।।

योग दिवस को मनाए,करें योग की बात।
सूरज को करिए नमन,करें योग का साथ।।

यह सेहत भी बनाता, करें योग उपचार।
ॐ शब्द का ध्यान करें,है जीवन का सार।।

हमें पढ़ाता योग है,अनुशासन का पाठ।
खुशियों के दीये जले,जीवन होगा ठाठ।।

सारे जग से जोड़ दे,चले योग की ओर।
प्राणायाम और योग ,मन का नाचे मोर।।

करें प्रतिदिन योगासन,योग मिटाते रोग।
सुबह और शाम कीजिए,करें हमेशा योग।।

जीवन में करना योग,यह होगा सुंदर तन।
है जीवन में उपयोग, प्रसन्न होगा यह मन।।

होगी नहीं बीमारी,यह तन बने सुडोल।
ये समझेंगे सब लोग,ये योग है अमोल।।

डॉ. भेरूसिंह चौहान “तरंग”
४रोहिदास मार्ग , झाबुआ
जिला – झाबुआ (म. प्र.)
पिन : ४५७६६१
मो.नंबर : ७७७३८६९८५८

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