Poem on sparrow in Hindi

गोरैया | Poem on sparrow in Hindi

गोरैया

( Goraya )

 

चहचहाती गोरैया फुदकती सबके मन को हर्षाती
रंग बिरंगी डाल डाल पे जब पंख पसारे उड़ जाती

 

नील गगन में उड़ाने भर छत पर आकर बैठती
सुंदर सी मनभावन लगती मीठी-मीठी चहकती

 

रौनक आ जाती घर में सब गौरैया को डाले दाना
फूरर फूरर उड़ना फिर आकर घर पर बैठ जाना

 

सारे बालक खुश हो जाते देखकर गोरैया मुस्काते
अठखेलियां मन को भाती झूम झूमकर सब गाते

 

जाने क्या परिवेश हो गया गौरैया लुप्त हो रही
उमंगे हर्ष खुशियां आज जाने कहां सुप्त हो रही

 

वृक्ष लताओं लदे वन ज्यों ज्यों कम होते जा रहे
चिड़िया का चहकना हम अब नहीं सुन पा रहे

 

मधुर मधुर गौरैया की घट में बस यादें बसा रहे
मन का पंछी ले रहा हिलोरे गीत यूं गुनगुना रहे

 

 ?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

आओ जलाएं नफरत की होली | Holi Shayari 2023 in Hindi

Similar Posts

  • मिलता वही सब आपको | Milta Wahi

    मिलता वही सब आपको  ( Milta wahi sab aapko )   लोक  जन   कल्याण  हेतु लिख   रहे   जो  काव्य  हैं, पीढ़ियों   को  सीख  देकर दे    रहे    जो    ताप    है, रह  गया  वंचित  अगर जो आज   के   इस   बात   से उसके लिए जीवन सदा ही जीवन  नहीं  अभिशाप  है।   क्या    कहूं    कैसे   कहूं   भावी …

  • टुकड़ों में बटी ज़िंदगी | Poem tukadon mei bati zindagi

    टुकड़ों में बटी ज़िंदगी ( Tukadon mein bati zindagi )   टुकड़ों में बटी ज़िंदगी जोड़ूँ कैसे सुलझाती इस ज़िंदगी को उलझ जाती हूँ कभी मैं सुलझाऊँ ‘गर खुद को तो उलझ कर रह जाये ज़िंदगी टुकड़ों का कोना तुड़ा मुड़ा जुड़े न इक दूजे से मसला – ए – ज़ीस्त हल करते करते खुद…

  • उमंग | Kavita Umang

    उमंग ( Umang ) भारतवर्ष हमारा है विकसित, सभ्यता,संन्कृति भी है उन्नत, षटॠतुऔं का होता आवाजाही हर ॠतु में आते पर्व,वर्चस्व,माही।। फाल्गुन पूर्णिमा में होली तौहार रंग,गुलाल का बासंती विहार, नाना उमंग का होता आप्लावन नई नवेली बधु के लिए,रास,धन।। संयोगी के लिए खास है परव, नानाविध पकवान का लुत्फ, इष्ट,मित्र मंड़ल संग होली,राम उमंग…

  • Kavita | अधरों पर मुस्कान है कविता

    अधरों पर मुस्कान है कविता ( Adharon par muskan hai kavita )   अधरों पर मुस्कान है कविता कवि ह्दय के भाव है कविता उर  पटल  पर  छाप छोड़ती सप्त सुरों की शान है कविता   वाणी का उद्गार है कविता वीणा की झंकार है कविता छू  जाती  मन  के तारों को देशभक्ति का गान…

  • शिव शंकर प्यारे | Shiv Shankar Pyare

    शिव शंकर प्यारे ( Shiv Shankar Pyare )   शिव शंकर प्यारे ओ भोले डमरू की डम डम ओ चिमटा बाज रहा छम छम निश दिन तुझे पुकारे शिव ओ शंभू प्यारे जटा से बहे भगीरथी धारा औघड़ दानी शंकर प्यारा भोले शंकर सबके सहारे हर लो बाबा कष्ट हमारे ओ शंभू प्यारे शिव शंभू…

  • मैं पेड़ हूँ | Ped par Kavita

    मैं पेड़ हूँ ( Main ped hoon )   मैं हूॅं एक जंगल का पेड़, फैला हूँ दुनिया और देश। निर्धन या कोई हो धनवान, सेवा देता में सबको समान।। जीवन सबका मुझसे चलता, सांस सभी का मुझसे चलता। बदले में किसी से कुछ ना लेता, सारी उम्र सबको देता ही रहता।। पहले मेरा जंगल…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *