Kavita sajna hai mujhe sajna ke liye

सजना है मुझे सजना के लिए | Kavita sajna hai mujhe sajna ke liye

सजना है मुझे सजना के लिए

( Sajna hai mujhe sajna ke liye )

 

सजना है मुझे सजना के लिए
दिल सजनी का झूम झूम गाने लगा
ओढ़ ली चुनरिया गोरे गालों पे
चांद भी थोड़ा सा शर्माने लगा

 

दुल्हन बनी फिर बहु श्रृंगार किया
पिया से मिलन को पुकार लिया
मनमीत मेरे दिलबर ओ जाने मन
दिलो जान से ज्यादा प्यार किया

 

हसीं ख्वाब तू मेरा है महताब तू
प्यार की हर नजाकत अंदाज़ तू
प्रित के प्यारे मोती पिरोये देखो
बरसे सावन सुहाना तुम्हें थाम लूं

 

प्यार की गलियों में हलचल सी हुई
मन का मधुबन जरा महकने लगा
सजना है मुझे सजना के लिए
गौरी मनोभाव यूं कहने लगा

 

सजना है मुझे सजना के लिए
तराना लबों पे मधुर आने लगा
चांद निकला आज निखरकर जरा
दिल से प्रियतम हमको लुभाने लगा

?

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

कर्तव्य बोध | Hiaku Kartavya Bodh

Similar Posts

  • मैं खुशनसीब | Main Khushnaseeb

    मैं खुशनसीब ( Main Khushnaseeb)   आज समझता हूं खुशनसीब खुद को काटों की दवा भेज दी खुदाने मुझको जख्मों की दवा लाया है दोस्त मेरा चमन की हवा लाया है दोस्त मेरा खुशनसीब फूल हूं मैं खिला हुआ कौन कहता है की मैं हूं बिखरा हुआ सवालों के घेरे से निकला हूं आज बाहर…

  • नंदवन के घर आनंद लाल

    नंदवन के घर आनंद लाल दयावान ही चक्रधारी है ,मुरलीवाला ही चमत्कारी है lराधा – कृष्ण – रुक्मणि है ,तरल लीला , कृष्ण लीला lसखी राधा तो सखा सुदामा l मुरली अगर सुरों की लीला ,तो मेघ सजे वर्षा की लीला lउँगली बनी गोवर्धन लीला ,कद्रू पुत्र यमुना कुंड लीला lआलम, मीरा, सुर में भी…

  • हमारी विरासत हमारी धरोहर | Poem hamari virasat

    हमारी विरासत हमारी धरोहर ( Hamari virasat hamari dharohar )     शौर्य पराक्रम ओज भरा दमकता हो भाल जहां। हम उस देश के वासी हैं बहती प्रेम रसधार यहां।   पुरखों की पावन संस्कृति रग रग में संस्कार भरा। दूरदर्शी सोच ऊंची विनयशीलता गुणों भरी धरा।   दुर्ग किले हमारी विरासत हमारी धरोहर प्यारी…

  • कविता की झंकार | Kavita ki jhankar

    कविता की झंकार ( Kavita ki jhankar )   तुकबंदी करते-करते कविता भी करनी आई अल्फाजों ने जादू फेरा मन में उमंग जगाई   शब्दों की माला पिरोता महके महफिल सारी गीतों की लड़ियों से गूंजती वो केसर क्यारी   भाव भंगिमा सुरताल साज बाज अल्फाज काव्य धारा में बह जाए अंतर्मन छिपे राज  …

  • सुसंस्कार | Susanskar

    सुसंस्कार ( Susanskar )    सुसंस्कारों की सुगंधि से, जीवन उपवन महकता रहे शिक्षा ज्ञान सहज अवबोध , प्रयोग व्यवहार धरातल । निर्माण आदर्श चरित्र, भविष्य सदा उज्ज्वल । आत्मसात कर नूतनता, पुरात्तन भाव चहकता रहे । सुसंस्कारों की सुगंधि से, जीवन उपवन महकता रहे ।। मान सम्मान मर्यादा ज्योत, अपनत्व अप्रतिम प्रसरण । तन…

  • ओघड़दानी भोलेबाबा | Oghadani Bholebaba

    ओघड़दानी भोलेबाबा ( Oghadani Bholebaba )   नीलकंठ महादेव सदाशिव कालो के महाकाल। भस्म रमाए डमरू वाले शीश सोहे चंद्र भाल। रूद्र रूप धरे प्रलयंकारी शशिशेखर नटराज। जटा से बहती गंगधारा गले वासुकी नागराज। बाघाम्बर धारी शंभू त्रिनेत्र शिव भोले अविनाशी। शिवशंकर महादेव हमारे ध्यान मग्न बैठे कैलाशी। मेरे शिव भोले भंडारी सबका करते कल्याण।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *