Sahodar par chhand

सहोदर | Sahodar par chhand

सहोदर

( Sahodar ) 

 

संग संग जन्म लिया,
संग मां का दूध पिया।
सहोदर कहलाए,
एक मां के पेट से।

सम सारे विचार हो,
शुभ सारे आचार हो।
रूप रंग मधुरता,
गुण मिले ठेठ से।

समभाव सद्भावों की,
जन्मजात प्रभावों की।
समता मिल ही जाये,
सांवरिया सेठ से।

शकल सूरत मिले,
दिलों के चमन खिले।
दो दिल जान एक हो,
कुदरत भेंट से।

 

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

उलझन भरी जिंदगी | Zindagi par chhand

Similar Posts

  • कालरात्रि | Chhand kalratri

    कालरात्रि ( Kalratri ) मनहरण घनाक्षरी   काली महाकाली दुर्गा, भद्रकाली हे भैरवी। चामुंडा चंडी रुद्राणी, कृपा मात कीजिए।   प्रेत पिशाच भूतों का, करती विनाश माता। सिद्धिदात्री जगदंबे, ज्ञान शक्ति दीजिए।   अग्नि ज्वाला से निकले, भयानक रूप सोहे। खड्ग खप्पर हाथ ले, शत्रु नाश कीजिए।   रूद्र रूप कालरात्रि, पापियों का नाश करें।…

  • बसंत | मनहरण घनाक्षरी | Basant ritu par chhand

    बसंत   हर्षाता खुशियां लाया, सुहाना बसंत आया। बहारें लेकर आया, झूम झूम गाइए।   मधुमास मदमाता, उर उमंगे जगाता। वासंती बयार आई, खुशियां मनाइए।   पीली सरसों महकी, खिली कलियां चहकी। फूलों पे भंवरे छाए, प्रेम गीत गाइए।   प्रीत के तराने छेड़े, मुरली की तान मीठी। मदन मोहन बंसी, मधुर बजाइये।     कवि…

  • वरदान | Vardan Chhand

    वरदान ( Vardan ) मनहरण घनाक्षरी     जिंदगी वरदान से, कम ना समझ लेना। हंसी खुशी आनंद से, जीवन बिताइये। मात पिता आशीष दे, करो सेवा भरपूर। चरण छूकर प्यारे, वरदान लीजिए। साधु संत ऋषि मुनि, करे जप तप योग। वरदान से सिद्धियां, शुभ कार्य कीजिए। बड़े-बड़े महारथी, योद्धा वीर बलवान। कठोर तपस्या करें,…

  • लड्डू | Laddoo par Chhand

    लड्डू ( Laddoo ) मनहरण घनाक्षरी   गोल मटोल मधुर, मीठे मीठे खाओ लड्डू। गणपति भोग लगा, मोदक भी दीजिए।।   गोंद मोतीचूर के हो, तिल अजवाइन के। मेथी के लड्डू खाकर, पीड़ा दूर कीजिए।।   खुशी के लड्डू मधुर, खूब बांटो भरपूर। खुशियों का चार गुना, मधु रस पीजिए।।   शादी समारोह कोई, पर्व…

  • सावन सुहाना आया | छंद

    सावन सुहाना आया | Chhand ( Sawan suhana aya ) (  मनहरण घनाक्षरी छंद )   सावन सुहाना आया, आई रुत सुहानी रे। बरसो बरसो मेघा, बरसाओ पानी रे।   बदरा गगन छाए, काले काले मेघा आये। मोर पपीहा कोयल, झूमे नाचे गाए रे।   रिमझिम रिमझिम, बरखा बहार आई। मौसम सुहाना आया, हरियाली छाई…

  • राम | घनाक्षरी छंद

    राम घनाक्षरी छंद ( 8,8,8,7 )   दोऊ भाई लगे प्यारे, बने धर्म के सहारे। फहराने धर्म ध्वजा, आये मेरे श्री राम।। दुखियों के दुख टारे, सब कुछ दिए वारे। वचन निभाने चले, वन को किए धाम।। राम -राज बना आज, पूरन हो सभी काज। बिगड़ी बनाते यही, रे – मन जपो नाम।। राम-राम रटे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *