Kavita Betiyon ko Padhne do

बेटियों को पढ़नें दो | Kavita Betiyon ko Padhne do

बेटियों को पढ़नें दो

( Betiyon ko padhne do ) 

 

आज बेटियों को सब पढ़नें दो,
और आगें इनको भी बढ़नें दो।
खिलने दो और महकनें भी दो,
अब पढ़ाई से वंचित न होने दो।।

इनको बनकर तारें चमकने दो,
परचम इनको अब लहराने दो।
हंसने दो और मुस्कराने भी दो,
अब पढ़ाई से वंचित न होने दो।।

चाहें बेटे हो अथवा बेटियाॅं दो,
अत्याचार नहीं अब होने न दो।
इन्हें ऊॅंची उड़ान अब भरने दो
अब पढ़ाई से वंचित न होने दो।।

अब पिंजरे मे इन्हें न रहनें दो,
आज़ाद पक्षी बनकर उड़नें दो।
झाॅंसी जैसा इतिहास रचानें दो,
अब पढ़ाई से वंचित न होनें दो।।

ज्वालामुखी सा इन्हें बनने दो,
अब अबला से सबला होने दो।
और आत्म-सम्मान से जीनें दो,
अब पढ़ाई से वंचित न होने दो।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

 

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