Poem Hawaon Mein aa Gaye

हवाओं में आ गए | Poem Hawaon Mein aa Gaye

हवाओं में आ गए

( Hawaon mein aa gaye )

 

शोहरत मिली तो आज हवाओं में आ गए
रिश्ते भुला के ख़ास ख़लाओं में आ गए।

हमको नहीं मालूम हुआ कब ये वाकया
कब ख़्वाब से सरकार दुआओं में आ गए।

फ़िरऔन मेरा इश्क़ बनाने लगा उन्हें
बुत के सनम वो आज़ ख़ुदाओं में आ गए।

यूं तो ख़फा ताउम्र रहे अब ये मोज़ज़ा
हम आज कल दिन रात सदाओं में आ गए।

रंजिश भुला के साथ रक़ीबों का जब मिला।
फिर यूं हुआ दिलशाद फ़जाओं में आ गए।

है बेहिसी का दौर इलाही ये कौन सा
जितने ज़हर थे आज दवाओं में आ गए।

करते नयन हैं क़त्ल मिरे सुन के बात ये
हम दिलकशी की शोख़ अदाओं में आ गए।

 

सीमा पाण्डेय ‘नयन’
देवरिया  ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

आजमाने की खातिर | Ghazal Aazmane ki Khatir

 

 

 

Similar Posts

  • जब भी कोई कहीं बिखरता है

    जब भी कोई कहीं बिखरता है जब भी कोई कहीं बिखरता हैअक़्स माज़ी का खुद उभरता है क्यूँ रखूँ ठीक हूलिया अपनाकौन मेरे लिए संवरता है चाहतें कब छिपी ज़माने मेंक़ल्ब आँखों में आ उतरता है वस्ल में हाले-दिल हुआ ऐसापेड़ झर झर के जब लहरता है बात कर लेना हल नहीं लेकिनजी में कुछ…

  • चलन में है अब | Chalan mein

    चलन में है अब ( Chalan mein hain ab )   सीने को खोलने का फैशन चलन में है अब और गाली बोलने का फैशन चलन में है अब देखो ज़रा संभल के तुम बात कोई बोलो कम करके तोलने का फैशन चलन में है अब ये दूध जैसी रंगत आई नहीं है यूं ही…

  • धूप ऐसी पड़ी मुह़ब्बत की

    धूप ऐसी पड़ी मुह़ब्बत की धूप ऐसी पड़ी मुह़ब्बत की।खिल उठी हर कली मुह़ब्बत की। शम्अ़ नफ़रत की बुझ गई फ़ौरन।बाद जब भी चली मुह़ब्बत की। उड़ गए होश सब रक़ीबों के।बात ऐसी उड़ी मुह़ब्बत की। बाद मुद्दत के आज देखी है।उनके रुख़ पर हंसी मुह़ब्बत की। लाख शोअ़ले उठे बग़ावत के।पर न सूखी नदी…

  • कलाम है क्या

    कलाम है क्या ये गोल मोल मुहब्बत भरा कलाम है क्यातमाम उम्र यहीं पर तेरा क़याम है क्या कबूल कैसे मैं कर लूँ बता तेरी शर्तेंबिना ये जाने तुझे लेना मुझसे काम है क्या जो बार बार मुझे हुक्म देता रहता हैसमझ लिया मुझे तूने बता गुलाम है क्या जो हर घड़ी चला आता है…

  • झूठी बातों को फिर हवा देंगें

    झूठी बातों को फिर हवा देंगें   मौत को मेरी सब दुआ देंगें । झूठी बातों को फिर हवा देंंगें ।। बाद तेरे करूँ गिला मैं क्यूँ । प्यार दिल में तिरा दिखा देंगें ।। जो न खोजे कसूर है किसका । वे ही निर्दोष को सजा देंगें ।। तुम ही कर लो वफ़ा जरा…

  • ज़िंदा तो हैं मगर

    ज़िंदा तो हैं मगर ख़ुद की नज़र लगी है अपनी ही ज़िन्दगी कोज़िंदा तो हैं मगर हम तरसा किये ख़ुशी को महफूज़ ज़िन्दगानी घर में भी अब नहीं हैपायेगा भूल कैसे इंसान इस सदी को कैसी वबा जहाँ में आयी है दोस्तों अबहालात-ए-हाजरा में भूले हैं हम सभी को हमदर्द है न कोई ये कैसी…

One Comment

  1. यूं तो ख़फा ताउम्र रहे अब ये मोज़ज़ा
    हम आज कल दिन रात सदाओं में आ गए।
    बेहतरीन गज़ल। गज़लकारा को बहुत बहुत शुभकामनाएं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *