Kavita Mere Avgun Har lo na Prabhu

मेरे अवगुण हर लो ना प्रभु | Kavita Mere Avgun Har lo na Prabhu

मेरे अवगुण हर लो ना प्रभु

( Mere avgun har lo na prabhu ) 

 

दर आया लेकर अरदास, मेरी झोली भर देना प्रभु।
मैं मूरख नादान हूं ईश्वर, मेरे अवगुण हर लेना प्रभु।
सृष्टि का संचार तुमसे ही, तुम ही पालनहारे प्रभु।
भर देते भंडार सबके, सारे जग के रखवारे प्रभु।

मन मंदिर में दीप जलाऊं, उजियारा कर देना प्रभु।
नाम भजूं दिन-रात हरे, मेरे अवगुण हर लेना प्रभु।

जब तप योग नहीं माला, भक्त तिहारा भोला भाला।
मंझधार में अटकी नैया, भगवन तू ही है रखवाला।
खुशियों से दामन भरके, जग रोशन कर देना प्रभु।
तुम ही एक मेरे सहारे, मेरे अवगुण हर लेना प्रभु

 

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

स्मित स्मृतियों की मृदु मंथर वात | Smrtiyon par Kavita

 

Similar Posts

  • हाय री सरकार | Hi Ri Sarkar

    हाय री सरकार ( Hi Ri Sarkar )    सड़क पर  निकल पड़ी है  नौजवानों की एक भीड़ बेतहासा बन्द मुठ्ठी, इन्कलाब जिन्दाबाद  के नारों के साथ.  सामने खड़ी है एक फौज मुकम्मल चौराहे पर  हाथ में लिए लाठी – डन्डे, आँसू गोले और  गोलियों से भरी बन्दूकें  चलाने के लिए मुरझाये चेहरे वाले  नौजवानों…

  • प्रेम पलेगा जब अंतस में | Kavita Prem Palega Jab Antas mein

    प्रेम पलेगा जब अंतस में ( Prem palega jab antas mein )   प्रेम पलेगा जब अंतस में,पीड़ा बारंबार मिलेगी निज स्वार्थ अस्ताचल बिंदु, समता भाव सरित प्रवाह । त्याग समर्पण उरस्थ प्रभा, स्पृहा मिलन दर्शन अथाह । पग पग कंटक शूल चुभन, पर मुखमंडल मुस्कान खिलेगी । प्रेम पलेगा जब अंतस में, पीड़ा बारंबार…

  • मानव, पानी और कहानी

    मानव, पानी और कहानी   जीवन झर झर झरता, है झरने सा, झरना झर झर बहता, है जीवन सा, मानव के ऑखो मे पानी, नदी, कूप, तालों मे पानी, पानी की कलकल है जरूरी, ऑखों की छलछल है जरूरी, मानव, पानी और कहानी, है धरती की यही निशानी, जीवन की जो कहानी है, झरने में…

  • मै नारी हूँ | Main Nari Hoon Kavita

    मै नारी हूँ ( Main nari hoon : Poem on nari ) ( 2 ) पुरुषों के समाज में अबला कहलाने वाली बेचारी हूं, सब कुछ सहकर चुपचाप आंसू बहाने वाली मैं नारी हूं। पुरुष को जन्म देने से मरण तक देती हूं साथ पुरुष का, उस वक्त भी होती जरूरी प्रदर्शन होता जब पौरुष…

  • गोवर्धन गिरधारी | Kavita Govardhan Girdhari

    गोवर्धन गिरधारी ( Govardhan Girdhari ) जय जय जय कृष्ण मुरारी गोवर्धन गिरधारी! पूर्णावतार प्रेमावतार रसनावतार भवतारी!! बाधा दूर करो तुम सबकी आकर के बनवारी! जय जय जय कृष्ण मुरारी गोवर्धन गिरधारी भंवर बीच में आज है भारत जिस पर तुमने जन्म लिया! आकर मुक्त करो संकट से जिसे दुष्टों ने ग्रसित किया!! मुरली मनोहर…

  • अंधी दौड़ | Kavita andhi daud

    अंधी दौड़ ( Andhi daud )   नशा और उन्माद यह सर्द रात कैसा दौर आज नशा और उन्माद संस्कृति का विनाश प्रश्न पूछने पर बड़े बेतुके जवाब चुप रह जाते आप बिगड़ रहा समाज अंधी दौड़ कैसी भागमभाग बेकाबू गाड़ियां बेखौफ सवार अंधकार चहु ओर नीरसता सन्नाटा मौत का तांडव कहीं कोई दिखाता  …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *