Poem Jaate Hue Lamhe

जाते हुए लम्हें | Poem Jaate Hue Lamhe

जाते हुए लम्हें!

( Jaate hue lamhe ) 

 

ख्वाहिशों की ये बारिश देर तक नहीं टिकती,
रितु चाहे हो कोई देर तक नहीं टिकती।
लूटो नहीं दुनिया को चार दिन का मेला है,
गिनकर दिया साँसें देर तक नहीं टिकती।

आँखें उसकी हिरनी-सी पागल कर देती है,
जवानी की ये खुशबू देर तक नहीं टिकती।
करती हैं कत्ल लड़कियाँ इल्जाम लगता नहीं,
ऐसी तलब मन में देर तक नहीं टिकती।

कभी जान होते थे उसकी हम साँसों का,
आशिक़ी की ये शमा देर तक नहीं टिकती।
साँसें टूट जाती हैं देखो चरागों की,
नींद उन सितारों की देर तक नहीं टिकती।

जाते हुए लम्हें वो लौट के नहीं आते,
कोई कली शाँखों पे देर तक नहीं टिकती।
इन सुर्ख होंठों को तू छूने से मत रोको,
पीने दो ये हाला देर तक नहीं टिकती।

खेलने दो बच्चों को दौर फिर न आएगा,
ये कच्ची उमर देखो देर तक नहीं टिकती।
सोने की रोटी को खाता नहीं कोई,
ऐसी बुलंदी भी देर तक नहीं टिकती।

 

रामकेश एम.यादव (रायल्टी प्राप्त कवि व लेखक), मुंबई

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/poem-in-hindi-on-aashiqui/

Similar Posts

  • यह वक्त भी बीत जाएगा | Kavita Yah Waqt bhi Beet Jayega

    यह वक्त भी बीत जाएगा ( Yah waqt bhi beet jayega )    कुदरत की यह अद्भुत लीला, रात गई तब दिन आएगा। चीर अंधेरा रवि निकलेगा, यह वक्त भी बीत जाएगा।। जन्म मरण का खेल रचा है, जो आता है सो जाता है। कर्मों के अनुसार जीव सब, किया कर्म ही भुगताता है। राजा…

  • 2624 वां महावीर जन्म कल्याणक दिवस

    2624 वां महावीर जन्म कल्याणक दिवस भगवान महावीर को मेरा भावों से शत – शत वन्दन !भगवान महावीर की राह को अपनायें ।मानव जीवन सफल बनायें ।अब भोर है उठ जाग जायें ।क्यों आँखें मूंदकर हम सोयें ।संत हमारी मूर्छित चेतना जगाते ।कीमती वक्त हमारा हम क्यों खोते।दुनिया की हैं यह झूठी माया ।जैसे बादल…

  • परिकल्पना | Kavita parikalpana

    परिकल्पना ( Parikalpana )   बाइस  में  योगी आए हैं, चौबीस में मोदी आएगे। भारत फिर हो विश्व गुरू,हम ऐसा अलख जगाएगे।   सदियों की अभिलाषा हैं, हर मन में दीप जगाएगे, हूंक नही हुंकार लिए हम, भगवा ध्वज लहराएगे।   सुप्त हो रहे हिन्दू मन में, फिर से रिद्धम जगाएगे। जाति पंथ का भेद…

  • पति की तड़प | Pati ki Tadap

    पति की तड़प ( Pati ki tadap )    प्यार की हैं पहली परिभाषा जिसके साथ रहो वही तमाशा पत्नी की जब बोली हो तगड़ी पति की होती घर में खिचड़ी , सर्पों की भाषा बोले जो प्राणी पत्नी पति का खून पीने वाली।। सजनी के बिन न होए भावर, साजन के बिन न भाए…

  • दीप जलाने होंगे | Kavita

    दीप जलाने होंगे ( Deep jalane honge )   दीप  जलाने  होंगे  जोत जलानी होगी शारदे दरबार तेरे अलख जगानी होगी   सिर पर रख दो हाथ मां भर दो भंडार मां शब्द सुमनहार मैया कर लो स्वीकार मां   वीणा वरदायिनी मोहक सुभाषिनी बुद्धि विधाता वाणी मां प्रज्ञादायिनी   लेखनी में भाव भर शब्द…

  • नाकाम | Kavita Nakaam

    नाकाम ( Nakaam ) दुनिया की उम्मीदों पर खरा ना उतर सका मैं। ज़िंदा रहते खुद को मरा ना समझ सका मैं। अपने कद का अंदाज़ा सदा रहा मुझे। अफसोस है कि खुद से बड़ा ना बन सका मैं। एक उनके लिए, और दूसरा अपने लिए ऐसे दोहरे चरित्र का प्रहसन ना पहन सका मैं।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *