Shyam Base Ghat Ghat

श्याम बसे घट घट | Shyam Base Ghat Ghat

श्याम बसे घट घट

( Shyam base ghat ghat ) 

 

हरिहरण घनाक्षरी

 

रामजी बसा लो घट, श्याम बसे घट घट।
पणिहारी पनघट, भर लाई नीर घट।

भोर भई निशा घट, प्रेम रहा उर घट।
राम बसे जब घट, पाप सारा जाए घट।

सर तीर भर घट, छलकत अध घट।
जला दीप घट घट, ज्ञान भर हर घट।

तृष्णा सारी जाए घट, प्रेम बरसाए घट।
हर्ष मौज छाए घट, भाव नव आए घट।

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

कण कण पाए हरि | Narayan Hari

Similar Posts

  • Chhand Shailputri | शैलपुत्री

    शैलपुत्री   मनहरण घनाक्षरी   शैलपुत्री वृषारूढ़ा, गिरिराज प्रिय सुता। त्रिशूलधारी भवानी, दुख हर लीजिए।   मंगलकारणी माता, दुखहर्ता सुखदाता। कमल नयनी देवी, वरदान दीजिए।   पार्वती मां हेमवती, शिव गौरी जगदंबे। यश कीर्ति वैभव दो, माता कृपा कीजिए।   सजा दरबार तेरा, अखंड ज्योति जलती। शक्ति स्वरूपा अंबे, शरण में लीजिए।   रचनाकार : रमाकांत…

  • चंदन | Chandan par Chhand

    चंदन ( Chandan )   प्रभु को अर्पण करें, मस्तक तिलक करें। चंदन की खुशबू से, जग महकाइये। रज धुली कण कण, पावन माटी चंदन। मातृभूमि वीर धरा, मस्तक नवाइये। चंदन बन महके, खुशियां हो घर द्वार। प्यार भरे बोल मीठे, तराने सुनाइये। रंग गुलाल लगाए, चंदन तिलक भाल। रंगीला त्योहार होली, खुशी से मनाइये।…

  • श्रीकृष्ण | Shri Krishna chhand

    श्रीकृष्ण ( Shri Krishna )   मनहरण घनाक्षरी   माधव मुरली वाले, गोकुल के घनश्याम। नंदलाल गिरधारी, लीलायें रचाइये।   यशोदा के राजदुलारे, जन जन के सहारे। चक्र सुदर्शन धारी, मुरली बजाइए।   राधा के मोहन प्यारे, जग के तारणहारे। जय हो तेरी केशव, विपद निवारिये।   सखा सुदामा हे कृष्णा, करुणासागर कान्हा। भक्तों के…

  • छंद घूंघट | मनहरण घनाक्षरी

    छंद घूंघट मान मर्यादा रक्षक, लाज शर्म धर ध्यान। चार चांद सौंदर्य में, घूंघट सजाइए। प्रीत की फुहार प्यारी, सुंदर सुशील नारी। पिया मन को लुभाती, घूंघट लगाइए। गौरी का श्रृंगार सौम्य, प्रियतम मन भाए। गोरा मुखड़ा चमके, घूंघट दिखाइए। पहने परिधान वो, घर की पहचान वो। भारत की शान नारी, घूंघट हटाइए। कवि : रमाकांत…

  • दिव्य अनुभूति | Divya anubhuti | Chhand

    दिव्य अनुभूति ( Divya anubhuti ) मनहरण घनाक्षरी   साधना आराधना से, दिव्य अनुभूति पाई। त्याग तप ध्यान योग, नित्य किया कीजिए‌।   हरि नाम सुमिरन, जपो नित अविराम। राम राम राम राम, भज लिया कीजिए।   मंदिर में दीप कोई, जलाता ले भक्तिभाव। रोशन यह जग सारा, ध्यान किया कीजिए।   घट घट वासी…

  • परीक्षा | Pareeksha par Chhand

    परीक्षा ( Pareeksha )   पग पग पे परीक्षा, लेता जग करतार। जीवन की डगर पे, चलिए जरा संभल। हर आंधी तूफां से, हर मुश्किल बाधा से। हौसलों की उड़ान से, छूएं आसमा नवल। घड़ी-घड़ी धैर्य धर, हर छानबीन कर। रिश्तो को परख कर, साख रखिए धवल। जिंदगी की जंग लड़े, उन्नति पथ पे बढ़े।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *