Kamyabi ke safar me

कामयाबी के सफ़र में | Kamyabi ke Safar me

कामयाबी के सफ़र में

( Kamyabi ke safar me ) 

 

कामयाबी के सफ़र में धूप बड़ी काम आई,
छाँव मिल गई होती तो कब के सो गए होते!

अपनों से ठुकराना भी यथार्थ साबित हुआ,
नहीं तो अपनी कला से हम वंचित रह जाते!

चले जाएंगे हमें यूं तन्हा छोड़ कर एक दिन,
पता होता तो कैसे भी करके उन्हें मना लेते।

अब रात दिन अश्क बहते हैं मेरी आँखों से,
चाहकर भी इन आँसूओ को नहीं रोक पाते!

 

कवि : सुमित मानधना ‘गौरव’

सूरत ( गुजरात )

यह भी पढ़ें :-

एक पुरुष की पीड़ा | Purush ki Peeda

Similar Posts

  • धोखा | Dhokha kavita

    धोखा ( Dhokha )   दे गये धोखा मुझे वो, बीच राह में छोड़कर। प्रीत का रस्ता दिखा, चले गए मुंह मोड़कर।   महकती वादियां सारी, फूल भी सारे शर्माने लगे। उनकी बेरुखी को हमें, अक्सर यूं बतलाने लगे।   मन में उठती लहरें सारी, अब हो चली उदास सी। कल तक वो बातें मीठी,…

  • तुम मत रोना प्रिय | Poem tum mat rona priye

    तुम मत रोना प्रिय ( Tum mat rona priye )   तुम मत रोना प्रिय मेरे, यह तेरा काम नही है। जिससे मन मेरा लागा, मोरा घनश्याम वही है।।   जो राधा का है मोहन, मीरा का नटवर नागर। वो एक रसिक इस जग का, मेरा मन झलकत गागर।।   शबरी की बेरी में दिखे…

  • आंचल की छांव | Kavita Aanchal ki Chhaon

    आंचल की छांव ( Aanchal ki chhaon )   वात्सल्य का उमड़ता सिंधु मां  के  आंचल  की  छांव सुख  का  सागर  बरसता जो  मां  के  छू  लेता  पांव   तेरे  आशीष  में  जीवन  है चरणों  में  चारो  धाम  मां सारी दुनिया फिरूं भटकता गोद  में  तेरे  आराम  मां   मेरे  हर  सुख  दुख  का पहले …

  • यादें | Yaadein

    यादें ( Yaadein )   कीमती होती है ,पुरानी खूबसूरत यादें, खुशी से आँखें नम हो जाती है । आज के दर्द को, कुछ पल के लिए भूलने में, ये कल की अच्छी यादें ही तो साथ निभाती है । हमारा आज ही कल बन जाएगा, बीता लम्हा दोबारा नहीं आएगा ; गमों की चादर…

  • कलियों की मुस्कान | Poem kaliyon si muskan

    कलियों की मुस्कान ( Kaliyon si muskan )   कलियों की मुस्कान भी देती आनंद अपार। नव ऊर्जा संचार कर लब लाती नई बहार। सुंदरता में चार चांद जड़ दे एक मुस्कान। सारा जहां अपना लगे प्यारा हर इंसान।   बगिया सारी महक उठे बस एक मुस्कान से। खिल उठे चेहरे सारे मुस्कुराते एक इंसान…

  • तुम क्यों नहीं आते | Tum Kyon Nahi Aate

    तुम क्यों नहीं आते ( Tum Kyon Nahi Aate )    पलाश के फूल भी मौसम आने पर खिल जाते हैं धरती और अंबर भी एक वक्त पर मिल जाते हैं मगर हम तुम क्यों मिल नहीं पाते ? मन के फूल क्यों खिल नहीं पाते ? आओ देखो ! बाग़ों में महुआ महक रहा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *