Gita Manas

गीता मानस | Poem on Gita Manas

गीता मानस

( Gita manas ) 

 

अद्भुत रचना शेष की , अलंकार रस छंद ।
गीता मानस को पढ़ें , दूर सभी हों द्वंद्व ।।

भगवद्गीता ग्रंथ का , छंदों में अनुवाद ।
जीवन को रसमय करें , करे दूर अवसाद।।

गीता मानस का सृजन , मानवता का पंथ ।
गूढ़ विषय सरलीकरण , है भविष्य का ग्रंथ।।

गायन वादन संग में , गीता मानस गान ।
मंगल उत्सव में करें , रसमय जीवन मान ।।

ज्ञान मुक्ति साधन सुलभ , परम ब्रह्म उपदेश ।
कृष्ण सुधारस पान से , भय चिंता नहिं लेश ।।

 

ओंकार सिंह चौहान

रचनाकार -ओंकार सिंह चौहान
धवारी सतना ( मध्य प्रदेश )

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