पराजय | Parajay

पराजय

( Parajay ) 

 

खड़े हो उम्र की आधी दहलीज पर ही
अभी ही कर लिया समझौता भी वक्त से
यह तो है ,पराजय ही स्वीकार कर लेना
लेने होते हैं कुछ निर्णय भी सख्त से

अभी ही न मानो हार तुम,उठा आगे बढ़ो
ऊंचा नही है शिखर कोई,नियमित चढ़ो
दुहराओ न गलतियां ,फिर वही जो गुजरी
हर दिन जीवन मे कुछ नवीनता को गढ़ो

कमियां छिपाकर,उसे संतुष्टि का नाम न दो
श्रेष्ठ होकर भी तुम,हार का अंजाम न दो
है ऋण शून्य से पहले ,तो आगे धन भी है
हार मे हालात ही नही ,तुम्हारा मन भी है

सूर्यास्त का अर्थ अंधेरा ही तो नही होता
वह तो आते हुए प्रभात की पहचान भी है
अपनी मानसिकता के बदल लेने मे ही
उज्वल नव जीवन का उदीयमान भी है

वक्त ठहरता नही कभी किसी का भी हो
उसे भी किसी की हार कभी स्वीकार नहीं
रहता है मंजिल को भी इंतजार राहगीर का
सफलता का सदा खुला रहता है द्वार

 

मोहन तिवारी

 ( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

तड़प उसकी | Tadap uski

Similar Posts

  • श्याम सलोने | Kavita

    श्याम सलोने ( Shyam Salone )   राधा को मिल गए श्याम राधा प्यारी गाती फिरे राधा जाने लगी संग गईया चली श्याम माखन में डुबकी लगाने लगे संग राधा के झूम झूम गाने लगे राधा बैठन लगी संग पायल बजी श्याम पांव में मेहंदी लगाने लगे संग राधा की झूम-झूम गाने लगे राधा खेलन…

  • सम्मान-पत्र/प्रमाण-पत्र | Praman Patra par Kavita

    सम्मान-पत्र/प्रमाण-पत्र ( Samman-patra : Praman patra )    जिन पत्रों पर लिखी‌ यें सब बातें, सही और प्रमाणिक मानी जाती ! उसको ही कहते है यें प्रमाण पत्र, जो प्रतिष्ठित व्यक्ति‌ संस्थाएं देती !! अनेंक प्रकार के होते प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण या मृत्यु प्रमाण पत्र ! जिसको बनाकर देती है सरकार, जाति प्रमाण या…

  • अभियंता | kavita abhiyanta

    अभियंता ( Abhiyantā )   हे अभियंता शिल्प नियंता तुम सृजन के आधार। बुद्धि विवेक ज्ञान के सागर हो सच्चे रचनाकार।   गुण माप तोल सब रखते रचते कीर्तिमान। गढ़ लेते कृति आप बने जीवन का आधार।   सकल जगत को देकर जाते निर्माणों की सौगात। याद करे दुनिया सारी जुबा पे होती सुहानी बात।…

  • हाँ मैं एक पुरुष हूं | Purush

    हाॅं मैं एक पुरूष हूॅं ( Han main ek purush hoon )    हाॅं मैं एक पुरूष हूॅं, मेरे परिवार की ज़रूरत हूॅं। मैं क्रूर एवं उग्र नही शान्त रहता हूॅं, अपनें परिवार के बारे में सोचता रहता हूॅं।। रिश्तों को समझता हूॅं, दर-दर भटकता रहता हूॅं। तीन बातों का ख़ास ध्यान रखता हूॅं, रूठना…

  • Badal par Hindi Kavita | बादल

    बादल! ( Badal )    मेरी मुंडेर की तरफ बढ़ रहा बादल, अरब सागर की तरफ से चढ़ रहा बादल। न जाने कितने क्विंटल पानी से है भरा, तूफानी हवाओं से भी लड़ रहा बादल। सूख चुके तालाब,नदी,डैम न जाने कब के, उनकी चीख- चीत्कार को सुन रहा बादल। सागर की कोख से फिर जन्म…

  • मधुर-मधुर मेरे दीपक जल

    मधुर-मधुर मेरे दीपक जल नभ,जल और धरित्री का, अंधियारा छट जाएसदैव ऐसे मधुर-मधुर मेरे दीपक जल । पुनि स्नेहिल गंगा पर्वत शिलाओं से निकल जाए,सदैव ऐसे मधुर-मधुर मेरे दीपक जल । कभी भटकाव ना किसी की जिन्दगी में आए,सदैव ऐसे मधुर-मधुर मेरे दीपक जल । सत्य-न्याय की हवा, जल,थल,नभ में फैल जाए,सदैव ऐसे मधुर-मधुर मेरे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *