Ganpati Bhagwan ki vandana

लम्बोदर | पंचाक्षरी पंचपदी

लम्बोदर

1
पर्व मनाता
सभ्यता
पूजा करता
नैतिकता
हमें लक्ष्य है श्रीनिवास!
2
जल्दी उठता
स्नान करता
व्रत रखता
पुण्य मिलता
ये आचार हैं श्रीनिवास!
3
गणेश पूजा
मनाता प्रजा
फूलों से सजा
भक्तों की मजा
लोगों की रीति श्रीनिवास!
4
लम्बोदर
खूब सुंदर
उसे आकार
अलंकार
गणेश रूप है श्रीनिवास!
5
लड्डू बनता
नैवेध्य देता
भात बनता
भूख मिटाता
भक्तों की सेवा श्रीनिवास!

6
पति का प्रेम
उल्लासम
पत्नी का प्रेम
आनंदम
वे पति पत्नी श्रीनिवास!
7
पति का प्रेम
पवित्रम
पत्नी का प्रेम
निरुपम
प्रेम बढ़िया श्रीनिवास!
8
क्लेश,सुख
आशा ,निराशा
रोग ,निरोग
प्रेम,द्वेष
वे समझते श्रीनिवास!
9
दिन रात
सेवा करता
धैर्य देता
प्रेम दिखाता
प्रेम मीठा है श्रीनिवास!

श्रीनिवास यन
आँध्रप्रदेश

यह भी पढ़ें:-

कामना | Kamna

Similar Posts

  • योग | Yoga Diwas

    योग ! ( Yoga )  ( विश्व योग दिवस विशेष )   खिला -खिला रहता है जीवन, जो भी योग अपनाता। छिपी हैं योग में अनंत शक्तियाँ, पर विरला इसे जगाता। प्राणायाम के माध्यम से हम, अपना विश्वास बढ़ाएँ । अनुलोम-विलोम,कपालभाती से, जीवन दीर्घायु बनाएँ। चुस्ती-फुर्ती रहती दिनभर, मन प्रसन्न भी रहता। बुद्धि-विवेक बढ़ता है…

  • वो एक क़िताब | Poem on kitab

    वो एक क़िताब ( Wo ek kitab )      सम्पूर्ण इतिहास समेटकर रखतीं वो एक क़िताब, देश और विदेशों में पहचान बढ़ाती यहीं क़िताब। शक्ल सूरत से कैसे भी हो देती सबको यें सौगात, हर प्रश्न का उत्तर है एवं श्रेष्ठ सलाहकार क़िताब।।   क़िताबें पढ़कर आगें बढ़ता संसार का यें नर नार, भरा…

  • स्वतंत्रता

    स्वतंत्रता   नभ धरातल रसातल में ढूंढ़ता। कहां हो मेरी प्रिये  स्वतंत्रता।। सृष्टि से पहले भी सृष्टि रही होगी, तभी तो ये बात सारी कहीं होगी, क्रम के आगे नया क्रम फिर आता है, दास्तां की डोर बांध जाता है।। सालती अन्तस अनिर्वचनीयता।।                        …

  • जन्म दिन | Janam din par kavita

    जन्म दिन ( Janam din )   आज जन्मदिन के अवसर पर हम दे क्या उपहार, सबसे बढ़कर आपको करते हैं हम प्यार।   मृदुल कोमल सरल है उत्तम नेक विचार, आप सुगंधित पुष्प सा फैलें जग संसार।   हृदय से है आपका वंदन बारंबार, क्या दे दे हम आपको दूजा और उपहार।   स्नेह…

  • सुकून की जिंदगी | Chhand sukoon ki zindagi

    सुकून की जिंदगी ( Sukoon ki zindagi ) मनहरण घनाक्षरी   दो घड़ी पल सुहाने, सुकून से जीना जरा। गमों का भी दौरा आये, हंस हंस पीजिए।   सुख से जियो जिंदगी, चैन आए जीवन में। राहत भरी सांस ले, खूब मजा लीजिए।   भागदौड़ सब छोड़, होठों से मुस्कुराइये। सुकून की सांस मिले, जियो…

  • काव्य कलश | Kavya Kalash Kavita

    काव्य कलश ( Kavya Kalash )   अनकहे अल्फाज मेरे कुछ बात कुछ जज्बात काव्य धारा बहे अविरल काव्य सरिता दिन रात काव्यांकुर नित नूतन सृजन कलमकार सब करते साहित्य रचना रचकर कवि काव्य कलश भरते कविता दर्पण में काव्य मधुरम साहित्य झलकता साहित्य सौरभ से कविता का शब्द शब्द महकता आखर आखर मोती बनकर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *