और घूंघट

और घूंघट

और घूंघट

 

शरद सिहरन चलन चटपट और घूंघट।
प्राण ले लेगी ये नटखट और घूंघट।।

 

कुंद इंदु तुषार सघनित दामिनी तन,
व्यथित पीड़ित प्रणयिनी सी काम बिन,
मिल रही कुछ ऐसी आहट और घूंघट।। प्राण०

 

नैन पुतरी मीन सी विचरण करें,
अधर फरकन चपला संचालन करे,
करत बेसर अकट झंझट और घूंघट।। प्राण०

 

सप्तद्वीप वसुंधरा ब्रह्मांड सारा,
चिरंतन से घूंघट जीता जगत हारा,
शेष तूं भी छोड़ खटपट और घूंघट।। प्राण०

 

 

?

 

लेखक: शेष मणि शर्मा “इलाहाबादी”
प्रा०वि०-बहेरा वि खं-महोली,
जनपद सीतापुर ( उत्तर प्रदेश।)

यह भी पढ़ें :

घूंघट न होता तो कुछ भी न होता

 

Similar Posts

  • विदाई का पल | Beti ki bidai par kavita

    विदाई का पल ( Bidai ka pal )    एक एक करके मेरे आँगन में चहकती महकतीं फुदकती चिड़िया जा रही है मुझसे दूर…. नयें आशियानें में तुम्हें याद है प्रिया बेटा जब कोचिंग संस्थान में तुम्हें छोड़ते समय मैंने देखी थी तुम्हारी भरी भरी आँखें और पूछते ही मेरे सीने से लगकर तुम रोने…

  • माँ की ममता | Maa ki mamta par kavita

    माँ की ममता ( Maa ki mamta )    आंचल में छुपाकर के अपने ममता के स्नेह से नहलाती है करती मां दुलार बच्चों को मोती प्यार भरे लुटाती है   सुकून सा मिल जाता है आंचल की ठंडी छांव में डांट फटकार लगती प्यारी मां स्वर्ग बसा है तेरे पांव में   मीठी मीठी…

  • अजमेर | Ajmer par kavita

    अजमेर ( Ajmer )   में हूँ एक जिला-अजमेर, राजस्थान का नम्बर एक। अजयराज ने मुझको बसाया, चौहान का फैला दूर तक साया।। जो था एक महान शासक, बुद्धिमान और वो ताकतवर। हाथी-घोड़े, धन-सम्पदा अपार, जिसका डंका बजता दरबार।। चारों तरफ अरावली पहाड़, झीलें और मनमोहक ये पार्क। क्या बताएं हम यहाँ का वर्तान्त, छटा…

  • हिंदी दिवस | Hindi diwas par poem

    हिंदी दिवस ( Hindi diwas ) मनहरण घनाक्षरी     हिंदी गौरव गान है, देश का अभिमान है। दिलों में बसने वाली, गुणगान गाइए।   सुर लय तान हिंदी, साज स्वर गान हिंदी। गीतों की झंकार हिंदी, होठों पे सजाइए।   राष्ट्र का उत्थान हिंदी, वीरों का सम्मान हिंदी। यश गाथा बांकूरो की, हूंकार लगाइए।…

  • Hindi Poetry On Life | Hindi Poetry -मित्र

    मित्र ( Mitra )   बाद वर्षो के कितने मिले हो मुझे, अब कहो साल कैसा तुम्हारा रहा।   जिन्दगी मे कहो कितने आगे बढे, जिन्दगी खुशनुमा तो तुम्हारा रहा।   मित्र तुम हो मेरे साथ बचपन का था, पर लिखा भाग्य मे साथ अपना न था।   ढूँढता  मै  रहा  हर  गली  मोड  पर,…

  • हृदय | Hriday

    हृदय ( Hriday ) हृदय वक्ष में स्थित,करे तंत्र संचार।जैसा रखे विचार मानव,वैसा प्रवाहित हो ज्ञान।कहते हृदय स्वस्थ रखो,करते इसमें प्रभु निवास।यदि दुष्टता भाव रखो,न लग पाओगे पार।नित योग, व्यायाम करो,निर्मल भाव सदा रखो।हृदय नियंत्रण तन करे,रक्त को शुद्ध करे।बिना रुके, बिना थके,हृदय प्रक्रिया जारी रखे।सागर की लहरों जैसी,तरंगे उठती इसमें वैसी।प्रेमियों की धड़कन हृदय,प्रकट…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *