देख लिए बहुत | Dekh liye Bahut

देख लिए बहुत

( Dekh liye bahut ) 

 

निभा लिए झूठ का साथ बहुत
आओ अब कुछ सच के साथ भी हो लें
देख लिए उजाले की चमक भी बहुत
परखने के तौर पर शाम के साथ भी हो लें

जमा लिए बाहर भीतर साधन कई
खो दिए हांथ पैर ,बीमारी पाल लिए
आओ देखते हैं त्यागकर आराम तलबी
लगा इत्र नकली,गंध पसीने की को दिए

निज भाषा, निज ज्ञान से नफरत किए
गैर की संस्कृति ले नग्न भी होते गए
बेशर्मी से उतर गए कपड़े भरी महफिल मे
अब ,लोक लाज की परंपरा मे भी जी लें

परिवार ही नही टूटे हैं केवल हमारे
रिश्तों से भी बच्चे अछूते ही रह गए
अपनों की चलती सांसों की भी खबर नही
अपने ही घर मे भी हम गैर बनकर रह गए

आकाश मे ऊंचाइयों को रोका है किसने
धरती के दामन मे भी आई जीना सीख लें
रह लिए बहुत ऊंची उड़ानों के साथ भी
आओ ,अपनों के साथ भी रहकर अब देख लें

 

मोहन तिवारी

 ( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

जीवन की सत्यता | Jeevan ki Satyata

Similar Posts

  • ढूंढते ही रह जाओगे | R K Rastogi poetry

    ढूंढते ही रह जाओगे ( Dhundte hi reh jaoge )    बातो में कुछ बाते, चीजों में कुछ चीजे, इक्कीसवीं सदी में, ढूंढते ही रह जाओगे। घरों में पुरानी खाट, तराजू के लिए बाट, स्कूलों में बोरी टाट, ठेलो पर अब चाट। ढूंढते ही रह जाओगे।। आंखो में अब पानी, कुएं का ताजा पानी। दादी…

  • 2020, Only Save Life kavita

    2020, Only Save Life     ->हाँ ये साल 2020, सिर्फ जीवन बचाने को है || 1.लाखों बेघर, करोडों रोड पर, बस घर जाने को है | कई ट्रेनों मे, कई बसों मे, कई पैदल ही आने को है |   पांव के छाले चीख रहे, मौतों से मजदूर खौंप मे है | क्या होगा मंज्जर…

  • डॉ. चंद्र दत्त शर्मा की कविताएं | Dr. Chander Datt  Sharma Poetry

    रक्तदान – रागनी तरज मानी नी माई मुंडेर… रक्तदान तै बड़ा दान ना, सबने न्यूं समझा दयो।18 वर्ष की उम्र हुवे जब परोपकार मैं ला दयो ।।भाइयों रै, सजनों रै…. भाइयों रै, सजनों रै….। आदमी का दुनिया मैं ना सदा एक-सा बख्त होवैघायल हो या कोए बीमारी संजीवनी यू रक्त होवैबख्त होवै जब काम आण…

  • श्वेत वर्ण | Kavita Shwet Varn

    श्वेत वर्ण ( Shwet varn )    पावन वर्ण श्वेत को मानो प्रतीक शांति का सारा। सादगी सुचिता सौम्यता वर्ण बहती प्रेम की धारा। धवल वस्त्र धारणी वीणावादिनी कमलासिनी। शब्दों का भंडार देती मां वागेश्वरी वरदायिनी। निर्मल मन विचार उच्च उज्जवल हो मनोभाव। शांत स्वभाव धैर्य धर सब श्वेत वर्ण का प्रभाव। त्रिदेवों में देव…

  • क्रांतिवीर | Kranti Diwas Par Kavita

    क्रांतिवीर ( क्रांति दिवस पर अमर शहीदों के जज्बातों को सादर वंदन )   है हिमालय सा हौसला, सागर सी गहराई है। क्रांति काल में वीरों ने, प्राणों की भेंट चढ़ाई है। हंसते-हंसते झूल गए, वो क्रांतिवीर कमाल हुए। राजगुरु सुखदेव भगतसिंह, भारत मां के लाल हुए।   आजादी का दीवाना, वो जिद पर अड़…

  • Lokgeet | चैती

     चैती ( Chaiti Lokgeet )   काहे  गए  परदेश  सजनवा,  काहे  गए  परदेश। प्रीत मोरी बिसरा के सजनवा,छोड़ गए निज देश।   फागुन बीता तुम बिन सजनवा,चैत चढा झकझोर। भरी दोहपरी अल्लड उडे है, गेहूंआ काटे मलहोर।   पुरवा पछुआ कभी उडे तो, कभी उडे चकचोर। सांझ  ढलत  ही चैती गाए तब, नैन बरसाए नीर।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *