क्रांतिवीर

क्रांतिवीर | Kranti Diwas Par Kavita

क्रांतिवीर

( क्रांति दिवस पर अमर शहीदों के जज्बातों को सादर वंदन )

 

है हिमालय सा हौसला, सागर सी गहराई है।
क्रांति काल में वीरों ने, प्राणों की भेंट चढ़ाई है।
हंसते-हंसते झूल गए, वो क्रांतिवीर कमाल हुए।
राजगुरु सुखदेव भगतसिंह, भारत मां के लाल हुए।

 

आजादी का दीवाना, वो जिद पर अड़ सकता है।
बलिदानी पावन पथ पर, देशभक्त बढ़ सकता है।
झंडा ऊंचा रहे हमारा, सदा तिरंगा शान रहे।
जुबां जुबां पर वंदे मातरम, गीतों से जय गांन रहे।

 

जयहिंद का गूंजे नारा, सरहद की सीमाओं में।
भारत मां जयकारे गुंजे, हर घाटी फिजाओं में।
राष्ट्रधारा में झूम रही है, हर युवा तरुणाई जो।
आजादी उत्सव आया, खुशियों से झोली भर लो।

 

?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

सुमन हिय के खिल गये | Geet

 

Similar Posts

  • शैलपुत्री | Kavita shailputri

    शैलपुत्री ( Shailputri )   गिरिराज घर जन्मी देवी शैलपुत्री कहलाई। कमल सुशोभित कर में शक्ति स्वरूपा माई।   तुम त्रिशूलधारी भवानी हो वृषारूड़ा हो माता। मंगलकारणी दुखहर्ता मां तुम ही हो सुखदाता।   प्रजापति ने यज्ञ किया सब देवन को बुलवाया। विकल हो गई सती मां शिवशंकर नहीं बुलाया।   घर पहुंची मैया स्नेह…

  • प्रतिशोध | Kavita pratisodh

    प्रतिशोध ( Pratisodh )   प्रतिशोध की उठती ज्वाला जब अंगारे जलते हैं सर पर कफ़न बांधे वीर लड़ने समर निकलते हैं   जब बदले की भावना अंतर्मन में लग जाती है तन बदन में आग लगे भृकुटियां तन जाती है   तीखे बाण चले वाणी के नैनों से ज्वाला दहके प्रतिशोध की अग्नि में…

  • कुछ शब्द शेर के | Sher ke kuch shabd

    कुछ शब्द शेर के ( Kuchh shabd sher ke ) ……. मुसाफिर तंन्हा हूँ मै, साथ चलोगे क्या, तुम मेेरे। है मंजिल दूर, सफर मुश्किल , क्या साथ चलोगे मेरे। यही है डगर, एक मंजिल है तो फिर, साथ चलो ना, सफर कट जायेगा दोनो का, हमसफर बनोगे मेरे। …… करेगे दुख सुख की बातें,…

  • राम वैभव | Ram Vaibhav

    राम वैभव ( Ram vaibhav )   वैदेही अनुपमा,राम वैभव आधार जनक दुलारी महिमा अद्भुत, प्रातः वंदनीय शुभकारी । राम रमाकर रोम रोम, पतिव्रता दिव्य अवतारी । शीर्ष आस्था सनातन धर्म, सुरभि संस्कृति परंपरा संस्कार । वैदेही अनुपमा,राम वैभव आधार ।। मृदु विमल अर्धांगिनी छवि, प्रति पल रूप परछाया । प्रासाद सह वनवास काल, अगाथ…

  • Hindi poem on Bazaar | Hindi Kavita -बाजार

    बाजार ( Bazaar ) गहन तम में उजाले कि,क्यो मुझसे बात करते हो। अन्धेरों मे ही जब मुझसे वफा की, बात करते हो।   नही पहचान पाते हो जब मुझे, दिन के उजालों में, मोहब्बत वासना है फिर भी क्यो जज्बात कहते हो।   ये महफिल है मोहब्बत की,शंमा हर रात जलती है। सुलगते  जिस्म …

  • पं. दीनदयाल उपाध्याय | Pt. Deendayal Upadhyay

    पं. दीनदयाल उपाध्याय ( Pt. Deendayal Upadhyay )    वो महान विचारक राजनेता एवं समाज-सुधारक थें, भारतीय जनसंघ पार्टी बनानें में योगदान वे दिए थें। काॅलेज समय में राजनीति का निर्णय वो ले लिए थें, कई-उपलब्धियां कम समय में वे हासिल किए थें।। पं. दीनदयाल उपाध्याय था उस महापुरुष का नाम, कभी पत्रकार के रुप…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *