छौङ दो नफरतों को करो प्यार तुम

छौङ दो नफरतों को करो प्यार तुम

छौङ दो नफरतों को करो प्यार तुम

 

छौङ दो नफरतों को करो प्यार तुम।

यार बनके दिखाओ समझदार तुम।।

 

चाहते  हो अगर  फूल  तुमको मिले।

चुन ही लेना किसी राह से ख़ार तुम।।

 

मान अहसान  उसका मददगार जो।

सर झुका करके रहना वफादार तुम।

 

सब सुखों में समझ साथ दुख में समझ।

छौङ  दो  यूं  उसी   पे  सभी भार तुम।।

 

जीत पाता वही हार पाता है जो।।

इस गणित को न समझो यूं बेकार तुम।।

 

मान  जाओगे तुम भी इसी बात को।

हर दफा कर ना पाओगे इंकार तुम।।

 

दाव सब जीत जाना भी अच्छा नहीं।

मान कर भी तो देखो कभी हार तुम ।

 

आंच  आए  उसूलों  पे  झुकना नहीं।

ये दिखा दो सभी को हो खुद्दार तुम।।

 

भेद  अपने  पराये  का   करता नहीं।

वैर  दिल में समझ लेना अंगार तुम।।

 

कौन अपना पराया समझ लो”कुमार”।

गौर  से  देख  लो बस ये संसार तुम।।

 

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कवि व शायर: Ⓜ मुनीश कुमार “कुमार”
(हिंदी लैक्चरर )
GSS School ढाठरथ
जींद (हरियाणा)

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अपने मिलते अनजानों में

 

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