Naino se Barse Angare

नयनों से बरसे अंगारे | Naino se Barse Angare

नयनों से बरसे अंगारे

( Naino se barse angare ) 

नयनों से बरसे अंगारे फिर नेह कहां बरसाएंगे।
जो शीश काटने वाले हैं आशीष कहां दे पाएंगे।

खड्डे खोदे मुंह के आगे रस्ता कैसे बतलाएंगे।
नोच नोचकर खाने वाले वो दर्द कहां मिटाएंगे।

जिनकी नियत में खोट भरा प्यार कहां से लाएंगे।
वाणी के तीर चलाते जो हृदय छलनी कर जाएंगे।

सुविधाओं के भोगी है संकट कैसे सह पाएंगे।
जो पीर पराई न जाने वो दानव ही कहलाएंगे।

जो अड़चन का भंडार भरे वो साथ कहां दे पाएंगे।
तूफानों का बाजार बने वो बहार कहां से लाएंगे।

बाधाएं जिनकी कुदरत है खुशियां चट कर जाएंगे।
आस्तीन के सर्प विषैले जहरीले फन ही फैलाएंगे।

दुष्चक्रों के जाल बुनते वो पुष्प कहां बरसाएंगे।
टांग खींचने वाले हमको तरक्की क्या दे पाएंगे।

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

यूं ना मुस्कुराया करो | Yun na Muskuraya Karo

Similar Posts

  • नव वर्ष 2023 | Nav Varsh 2023 par kavita

    नव वर्ष 2023 ( Nav Varsh 2023 )    नव वर्ष नूतन वर्ष की सभी को शुभकामनाएं पुष्पित पल्लवित होते रहे यही है दुआएं कदम दर कदम बढ़े जाएं यही कामनाएं राष्ट्रहित जन कल्याण की हो प्रबल भावनाएं कलुषित विचार त्याग हो नयी धारणाएं जाति धर्म विद्वेष से परे नया समाज बनाए   डॉ प्रीति…

  • डॉ. राही की कविताएं | Dr. Rahi Hindi Poetry

    हृदि समंदर ! मन के अन्दर ! एक समन्दर ! एक समन्दर ! मन के अन्दर । गहरा – उथला उथला – गहरा तट पे बालू – रेत समन्दर । इच्छाओं की नीलिमा ले मन का है आकाश समन्दर। इसमें सपनों के मोती हैं संघर्षों की प्यास समन्दर। इसके गहरे पानी पैठ अनुभव के हैं…

  • देश हमारा हम हैं इसके | Kavita Desh Hamara

    देश हमारा हम हैं इसके ( Desh hamara hum hain iske )    जिन भावों को मन में धर के, उत्सव खूब मनाया है। जिन भावों को राष्ट्रगान में, मिलकर हमने गाया है।। जिन भावों से भारत मां की, जय जयकार लगाई है। जिन भावों से संविधान की, तुमने रखी दुहाई है।। एक निवेदन उन…

  • आओ रोएँ

    आओ रोएँ ०जिसको खोया उसे याद कर बिलखें कलपें नयन भिगोएँआओ रोएँ०जो न खो गए उनको भूलेंखुशी दफ़्न कर, मातम वर लेंनंदन वन की जमीं बेचकरझट मसान में बसने घर लेंसुख-सपनों में आग लगाकरदुख-दर्दों के बीजे बोएँआओ रोएँ०पक्ष-विपक्ष नयन बन जाएँभूले से मत हाथ बँटाएँसाथ न चलकर टाँग अड़ाएँफूटी आँख न साथी भाएँनहीं चैन से…

  • सुन्दर श्याम | Sundar Shyam

    सुन्दर श्याम ( Sundar Shyam )    शांत सौम्य सुन्दर श्याम जन्म पर जिनके क्या खूब बरसे घनश्याम पहुँचे फिर भी गोकुल धाम बंसी की धुन पर नाचे गैया नचाते राधा को भी श्याम ध्यान में जिनके जग सारा, उनको राग सिखाते श्याम खेल है जिनका सृष्टि रचना उस सृष्टि का हिस्सा श्याम करने नए…

  • मन की दीवार | Man ki Deewar

    मन की दीवार ( Man ki deewar )   मर सी जाती हैं भावनाएं दिन रात की नित तकरार से हो जाता है खत्म सा सफर शुरू करते हैं जिसे प्यार से कभी शक की खड़ी दीवार कभी बदलते विचारों की भिन्नता कभी किसी का बढ़ता प्रभाव उपजा ही देते हैं मन में खिन्नता कभी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *