Wah Pyar Kahan se Laoon

वह प्यार कहां से लाऊं | Wah Pyar Kahan se Laoon

वह प्यार कहां से लाऊं

( Wah pyar kahan se laoon )

 

जो प्यारा तुमको भी हो,
वह प्यार कहाॅ से लाऊॅ?
तुमको अपना कहने का
अधिकार कहाॅ से लाऊॅ?

तुम मुझसे रूठ गये हो,
मैं कैसे तुम्हें मनाऊॅ?
वह राह तुम्हीं बतला दो,
मैं पास तुम्हारे आऊॅ।

वह मंदिर कौन तुम्हारा,
जिसमें निवास करते हो?
किस आराधन साधन से,
सारा भवदुख हरते हो?

यदि तुम्हीं न हाथ रखोगे,
उपचार कहाॅ से लाऊॅ?
जो प्यारा तुमको भी हो,
वह प्यार कहाॅ से लाऊॅ?

मैं तो हूं दीन अकिंचन,
कुछ भी तो ग्यान नहीं है।
गंतव्य कौन है मेरा,
इसका भी भान नहीं है?

है घना अंधेरा छाया,
नभ में घनघोर घटाएं।
है प्रखर पवन बतलाता,
चलने वाली झंझायें।

अब डूब रही है तरणी,
पतवार कहाॅ से लाऊॅ?
जो प्यारा तुमको भी हो,
वह प्यार कहां से लाऊॅ?

क्या विधि-विधान पूजा का,
कैसे होता है वन्दन?
किस भांति समर्पित होता,
नैवेद्य सुमाला चन्दन?

कुछ भी तो ग्यात नहीं है,
कैसे प्रसन्न तुम होगे?
फिर भी विश्वास लिये हूॅ,
अपना ही मुझको लोगे।

टूटा सितार है मेरा,
स्वर तार कहाॅ से लाऊॅ?
जो प्यारा तुमको भी हो,
वह प्यार कहाॅ से लाऊॅ?

 

sushil bajpai

सुशील चन्द्र बाजपेयी

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

यह भी पढ़ें :-

हे नट नागर आओ | Hey Nat

Similar Posts

  • नया है साल ये बेशक मगर बातें पुरानी है

    नया है साल ये बेशक मगर बातें पुरानी है     नया है साल ये बेशक मगर बातें पुरानी है। न पूछो हाल तुम अपना नहीं यादें सुहानी है।।   हुए जब कैद घर अपने कटे सारे ज़माने से। नहींआज़ाद है अब तक यही जग की कहानी है।।   कहां मिलना किसी से था हुई…

  • इंसान की पहचान | Insan ki pehchan | Kavita

    इंसान की पहचान ( Insan ki pehchan )   इंसान की पहचान, मानव रे जरा जान। औरों के दुख दर्द की, परवाह कीजिए।   मानव धर्म जान लो, कर्म को पहचान लो। इंसानियत ही धर्म, शुभ कर्म कीजिए।   करुणा प्रेम बरसे, हृदय सारे हरसे। होठों पे हंसी सबको, मुस्काने भी दीजिए।   दुख दर्द…

  • दीप | Deep

    दीप ( Deep )    न सही विश्वास मेरा, पूछ ले उस दीप से। जो रात सारी रहा जलता, साथ मेरे बन प्रतिबम्ब।। हाल सारा जायेगा कह, दीप वह जो बुझ गया। जगने का सबब मेरा, और जलने के मजा।। मांगतीं विश्वास का बल, देख ले इक नजर भर। बस वही लेकर मैं संबल, जलती…

  • बात बन जाए | Baat ban Jaye

    बात बन जाए ( Baat ban jaye )    किसान की खेती में मिस्त्री की रोजी में बच्चों की खेलने की जवान की कमाने की भूखे को रोटी की प्यासे को पानी की मजदूर को दिहाड़ी की वैज्ञानिक को खोज की पेड़ को आक्सीजन की लड़की की सुरक्षा की लड़कों को सुधारने की भैंस से…

  • दो पहलू वाला | Kavita Do Pahlu Wala

    दो पहलू वाला ( Do Pahlu Wala ) मैं हूं उजाला काला दो पहलू वाला बिन आनन कानन वाला l मैं सीधा सदा भोला भाला l अजब गजब मेरा ठाठ निराला l हूं भरी गगरिया गुण अवगुण की मतवाला छैला रंग रंगीला l मेरी अदाओं पर सब घायल मेरे गुणों के सब कायल l जिसका…

  • कब बरसी सवनवाँ | कजरी

    कब बरसी सवनवाँ टप-टप चुवेला पसीनवाँ, हाय, कब बरसी सवनवाँ। लुहिया के चलले से सूखेला कजरवा, ऊपरा से नीचवाँ कब बरसी बदरवा। गरमी से आवें न पजरवाँ, हाय, कब बरसी सवनवाँ। टप-टप चुवेला पसीनवाँ, हाय, कब बरसी सवनवाँ। ताल-तलइया,नदिया,पोखरी सुखैलीं, अपने बलम के हम गोनरी सुतऊलीं। चिरई जुड़ाई कब खोंतनवाँ, हाय, कब बरसी सवनवाँ। टप-टप…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *