Insan ki pehchan

इंसान की पहचान | Insan ki pehchan | Kavita

इंसान की पहचान

( Insan ki pehchan )

 

इंसान की पहचान,
मानव रे जरा जान।
औरों के दुख दर्द की,
परवाह कीजिए।

 

मानव धर्म जान लो,
कर्म को पहचान लो।
इंसानियत ही धर्म,
शुभ कर्म कीजिए।

 

करुणा प्रेम बरसे,
हृदय सारे हरसे।
होठों पे हंसी सबको,
मुस्काने भी दीजिए।

 

दुख दर्द बांटे हम,
मोती बांटे प्रेम भरे।
काम आए आपस में,
सहायता कीजिए।

?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :- 

योग विश्व को भारत की देन | Yoga par kavita

Similar Posts

  • आदमी और आदमियत

    आदमी और आदमियत आदमी … खोता जा रहा है आदमियत होता जा रहा है संवेदन शून्य …. भूल गया है वो इन्सानित गिरवी रख दी है मानवीयता आ गई है उसमें हैवानियत भरी हुई है उसके दिलोदिमाग में शैतानियत……!!!! निर्मल जैन ‘नीर’ ऋषभदेव/राजस्थान यह भी पढ़ें :- हे कृष्ण मुरारी | Hey Krishna Murari

  • अद्भुत है फागुन

    अद्भुत है फागुन मधुमक्खियाँकितनी व्यस्त हैं इन दिनोंउन्हें ठहरने कीबात करने कीभी फ़ुर्सत नहीं हैउन्हें तो लाना है परागउन्हें आकर्षित करते हैंमहकते हुए बागवह कर रही हैंअपना काम निस्वार्थ भाव सेहँसी ख़ुशी से चाव-चाव सेमहुए के फूलों की मादकताअंकुरित आम मंजरियों की कोमलतापलाश की आभागेहूँ की गंधअलसी के फूलों का रंग टेसू की महकसरसों के…

  • तलाश | Talaash

    तलाश ( Talaash )   खड़े रहते हैं राह में, गम हरदम खुशी की तलाश में, उम्र गुजर जाती है बहुत मुश्किल है, यकीन कर पाना अपनों को ही समझने मे उम्र गुजर जाती है पसरा है फिजां मे, धुंआ भी कुछ इस कदर मंजिल की तलाश मे ही, उम्र गुजर जाती है खारों से…

  • एक बार मनुहार करना जरूर

    एक बार मनुहार करना जरूर नदी की तरह तुम बहना जरुर,सुभावों को नमन करना जरूर। मन का मीत जब मिल जाए,एक बार मनुहार करना जरुर। मनुजता की पहली पसंद प्रेम,जीवन में सच्चा प्रेम करना जरुर। गम का शोर बेहिसाब समुन्दर में,नदी बनकर समुद्र से मिलना जरूर । झुरमुट की ओट से झांकती चाँदनी,चाँद संग सितारों…

  • देख लिए बहुत | Dekh liye Bahut

    देख लिए बहुत ( Dekh liye bahut )    निभा लिए झूठ का साथ बहुत आओ अब कुछ सच के साथ भी हो लें देख लिए उजाले की चमक भी बहुत परखने के तौर पर शाम के साथ भी हो लें जमा लिए बाहर भीतर साधन कई खो दिए हांथ पैर ,बीमारी पाल लिए आओ…

  • हे हंसवाहिनी,ऐसा वर दे | Hey Hans Vahini

    हे हंसवाहिनी,ऐसा वर दे ( Hey hans vahini aisa var do )   मृदुल मधुर ह्रदय तरंग, स्वर श्रृंगार अनुपम । विमल वाणी ओज गायन, ज्योतिर्मय अन्तरतम । गुंजित कर मधुमय गान , नव रस लहर मानस सर दे । हे हंसवाहिनी,ऐसा वर दे ।। दुर्बल छल बल मद माया, प्रसरित जग जन जन ।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *