Dr. Nanak Das Ji Maharaj

डॉ. नानक दास जी महाराज | Dr. Nanak Das Ji Maharaj

डॉ. नानक दास जी महाराज

( Dr. Nanak Das Ji Maharaj )

 

समाज सुधारक संत है डाॅ. नानक दास महाराज,
कल्याणार्थ सेवाएं देकर यह जगा रहे है समाज।
आधुनिक भारत निर्माण में ये कर रहे है सहयोग,
विश्व शांतिदूत कहलाते ये राष्ट्रीय संत है आज।।

सद्गुरु कबीर विचारों को यह फैला रहे है संसार,
निःस्वार्थ निर्धनों को सेवाएं देकर कर रहे प्रचार‌।
स्वच्छ-छवि व चरित्रवान सभ्य ईमानदार इन्सान,
प्रोत्साहन कार्य कर रहे पर्यावरण रक्षा भरमार।।

पाखंड-आडंबर से मुक्तकर कराते सत्य का ज्ञान,
सद्गुरु कबीर सेवा-संस्थां बड़ी खाटू राजस्थान‌।
ज़रूरतमन्द असहायों को देता यह सेवा संस्थान,
समाजिक सद्भाव से जो बनाई अलग पहचान।।

भारतभूषण से अलंकृत एवं प्रखर-वक्ता है आप,
बीए, एमए डबल डाक्ट्रेट मानद उपाधि है आप।
धापू बाई माता का नाम एवं श्री मदन लाल बाप,
त्याग तपस्या साधना में जीवन बिताएं है आप।।

भजन-सत्संग, प्रवचन दिया किया जन कल्याण,
उत्कृष्ट काम करने वाले को दिये कबीर सम्मान।
नशामुक्त अभियान चलाकर किये चरित्र निर्माण,
जाति धर्म, भेदभाव से परे होकर बने है महान।।

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • नशा कुर्सी का | Kavita nasha kursi ka

    नशा कुर्सी का ( Nasha kursi ka )     नर झूम-झूम गाता नशा कुर्सी का छा जाता चंद चांदी के सिक्कों में बहुमत नेता पाता   कुर्सी का चक्कर ऐसा सत्ता के गलियारों में वादे प्रलोभन सीखो भाषण दो हजारों में   समीकरण सारे हो कुछ प्यादे हमारे हो जोड़-तोड़ राजनीति राजनीतिक वारे हो…

  • बेसुरी बांसुरी | Kavita Besuri Bansuri

    बेसुरी बांसुरी ( Besuri bansuri )   क्यों बनाते हो जीवन को बेसुरी सी बांसुरी फूंक कर सांसों को देखो सुर भरी है राग री।   चार  दिनों की चांदनी है फिर अधेरी रात री। कब बुझे जीवन का दीपक कर लो मन की बात री।   जोड़ कर रख ले जितना भी धन सम्पत्ति…

  • मन की उलझन | Man ki Uljhan

    मन की उलझन ( Man ki Uljhan ) मन को क्यों,उलझाना भाई ? मन से नहीं है ,कोई लड़ाई । मन की उलझन ,को सुलझायें । गांठ सभी अब ,खुल ही जायें । लायें बाहर अब, गुबार सारे । जिससे मिटें ,संताप हमारे । मन को , जितना उलझायेंगे । उतना कष्ट , हम ही…

  • उम्मीद | Ummeed

    उम्मीद ( Ummeed )    उम्मीद आसरा है, सहारा है, बल है उम्मीद उत्तर है, रास्ता है, हल है उम्मीद ज़िगर है, करेजा है, दिल है उम्मीद मूल है, ब्याज है, हासिल है उम्मीद बंधन है, जुड़ाव है, लगाव है उम्मीद परीक्षा है, फल है, दबाव है उम्मीद मंजिल है, ख़्वाब है, कामना है उम्मीद…

  • बनारस | Banaras par Kavita

    बनारस ( Banaras )   (भाग -1)   भोले का दरबार बनारस, जीवन का है सार बनारस। विश्व मशहूर सुबह-ए-बनारस, देखो अस्सी घाट बनारस। संस्कृति का श्रृंगार बनारस, मुक्ति का है द्वार बनारस। होता है अध्यात्म का दर्शन, भक्ति का संसार बनारस। प्रथम सभ्यता का उद्गम, तीर्थों का है तीर्थ बनारस। है त्रिशूल पे टिकी काशी,…

  • आओ पेड़ लगाए | Kavita Aao Ped Lagaye

    आओ पेड़ लगाए ( Aao Ped Lagaye )   आओ पेड़ लगाए मिल हरियाली हम लाएं। हरी भरी धरती को आओ हम स्वर्ग बनाए। पर्यावरण के बन प्रहरी कुदरत को संभाले। प्राणवायु देते हमें आओ फर्ज को निभा ले। एक आदमी एक पेड़ संकल्प हमको लेना। एक वृक्ष मेरी ओर से भी बढ़कर लगा देना।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *