अमराई बौराई

अमराई बौराई

अमराई बौराई

 

पीपल के पात झरे
पलाश गये फूल।
अब भी न आये वे
क्या गये हैं भूल।

गेंदे की कली कली
आतप से झुलसी,
पानी नित मांग रही
आंगन की तुलसी,

अमराई बौराई
फली लगी बबूल।
पीपल के पात झरे
पलाश रहे फूल।

काटे नहीं रात कटे
गिन गिन कर तारे,
कोयलिया कूक रही
घर के पिछवारे,

हहर हहर पवन चले
उड़ रही है धूल।
पीपल के पात झरै
पलाश रहे फूल।

आने की बात कही
लौट के न आये,
कांटे सी सूख रही
कौन पिये खाये,

हृदय अधीर हो रहा,
चुभ रहा है शूल।
पीपल के पात झरे,
पलाश रहे फूल।

sushil bajpai

सुशील चन्द्र बाजपेयी

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

यह भी पढ़ें :-

बसो इस हिये | Baso is Hiye

Similar Posts

  • इंटरनेट की दुनिया | Kavita internet ki duniya

    इंटरनेट की दुनिया ( Internet ki duniya )   इंटरनेट का आया जमाना मोबाइल चलन हुआ कर लो दुनिया मुट्ठी में लाइव चैटिंग फैशन हुआ   मोबाइल में जान तोते की भांति मन में बसने लगा साइबर अपराध बढ़ गए ठग नेट पर ही ठगने लगा   ऑनलाइन क्लासे चलती गुरुकुल विद्या आए कैसे बैंकिंग…

  • शीतला माता | Poem sheetla mata

    शीतला माता ( Sheetla Mata )   शीतलता दात्री शीतला, शीतल करे हरे सब पीरा। जा पर कृपा करें माँ भवानी सहाय करे रघुवीरा।   गर्दभ हो विराजित माता, कलश मर्जनी कर सोहे। ठंडा बासी आपको भाता, श्वेतांबर माता मन मोहे।   चेचक रोग नाशिनी मैया, पीत ज्वर हर संताप हरे। आरोग्य  सुखदाता  माता,  हर्ष …

  • मौन निमंत्रण | Kavita Maun Nimantran

    मौन निमंत्रण  ( Maun nimantran )    मुझे क्या पता!  वह सामने था लिए कुछ भाव भरा संदेश खड़ा, किंतु मैं पूछ पड़ा तुम कौन यहां ? क्या कर रहा है? भला, मुझसे क्या चाहते हो? या मुझे बताना चाहते हो! कुछ अंतर्मन में लिए भाव भरा। वह मौन था पर कौन था यह  था…

  • हुंकार | Hunkar kavita

    हुंकार ( Hunkar )   मातृभूमि  से ब ढ़कर कोई, बात नही होती हैं। हम हिन्दू हैं हिन्दू की कोई, जाति नही होती हैं।   संगम तट पर ढूंढ के देखो, छठ पूजा के घाटों पे, हर हिन्दू में राम मिलेगे,चाहे चौखट या चौबारो पे।   गंगा  गाय  राम  तुलसी  बिन, बात  नही होती है।…

  • शिकायत Shikayat

    शिकायत ( Shikayat ) तूने नज़रें फेरीं, मगर तू मेरी रूह में बसी रह गई,तेरे बिना ये अधूरापन, जैसे कोई दास्तां अधूरी रह गई।तेरे बिना भी ये दिल तुझसे ही जुड़ा रहता है,शिकायतें हैं तुझसे, पर प्यार फिर भी हदों से परे करता है। तेरी खामोशियों में छिपी हैं अनगिनत बातें,तेरे ख्यालों से अब भी…

  • Kavita | गुनाह

    गुनाह ( Gunaah )   सद्भावों की पावन गंगा सबके   मन  को भाए वाणी के तीखे बाणों से कोई घायल ना हो जाए   प्रेम के मोती रहा लुटाता खता   यही    संसार  में कदम बढ़ाता फूंक फूंक कर कहीं  गुनाह  ना  हो जाए   कोई अपना रूठ ना जाए रिश्तो   के   बाजार   में घूम…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *