Astitva ki Talash

अस्तित्व की तलाश | Astitva ki Talash

अस्तित्व की तलाश

( Astitva ki Talash )

 

पुरुष प्रधान समाज में अटक रही है नारी,
जमीन आसमां के बीच लटक रही है नारी !

सब कुछ होकर भी कुछ पास नहीं उसके,
अस्तित्व की तलाश में भटक रही है नारी !

बंदिशों के जाल में फँसी मछली की तरह,
खुद से लड़ती किस्मत पटक रही है नारी !

जीने की चाह लिए मन ही मन खुश होती,
अपने में मस्त होकर मटक रही है नारी !

रास नहीं आता किसी को आगे बढ़ जाना,
हर इंसान की नज़र में खटक रही है नारी !!

DK Nivatiya

डी के निवातिया

यह भी पढ़ें:-

माहिया | Mahiya

Similar Posts

  • आराध्य श्रीराम बिराजे | Aaradhya Shri Ram

    आराध्य श्रीराम बिराजे ( Aaradhya shri ram viraje )   करवट बदली काल ने नियति ने युग पलट दिया। रामनाम है गूंज व्योम में आनंदित घट घट किया। राग द्वेष दंभ सब हारे धर्म ध्वजा नभ लहराई। आए अवध रघुनंदन खुशियों की घड़ियां आई। राम भक्ति में मतवाले झूमे राम नाम की जयकार। मर्यादा पुरुषोत्तम…

  • वो बुटाटी धाम | Butati Dham par Kavita

    वो बुटाटी धाम ( Wo Butati Dham )   जहां पर देश-विदेश से आतें है लाखों ही नर-नार, धाम निराला है वह जिसको जानता सारा संसार। कर रहा है कई वर्षो से मानव को सहायता प्रदान, संत चतुरदास जी महाराज का मंदिर पावन द्वार।। लकवा रोगी रोग-मुक्त होकर जहां हो जातें तैयार, सात दिन रूकना…

  • छठी मैया | Chhathi maiya kavita

    छठी मैया ( Chhathi maiya )   छठी मैया तुमको ध्याता रातदिन मां शीश नवाता। अक्षत रौली चंदन लेकर सरिता तीर भेंट चढ़ाता।   करती बेडा पार मैया तुम हो लखदातार मैया। सुख वैभव यश दाता सजा सुंदर दरबार मैया।   झारखंड उत्तराखंड आता जनमन माता मनाता। मनवांछित फल नर पाता तेरे दर गुणगान गाता।…

  • हिन्दी सजीव भाषा

    हिन्दी सजीव भाषा हिन्दी हमारी मातृभाषा हैहिन्दी हमारी राजभाषा हैहिन्दी से व्यवसाय हमाराहिन्दी हमारी लोकभाषा है । हिन्दी की है छाती चौड़ीसब भाषा इनके ओर दौड़ीसभी भाषा के शब्दों कोपरिवार जैसे अपनाया है । आराम , अफसोस…फारसी हैअमीर , गरीब…. अरबी हैचाय , पटाखा…. चीनी हैतोप , तलाश……तुर्की हैस्कूल, कॉलेज…अंग्रेजी हैआदि शब्दों को समाया है…

  • फागुन पर कविता | Poem in Hindi on Phagun

    फागुन पर कविता ( Phagun Par Kavita )    देखो फागुन आया है छटा में रंग छाया है खिली पलाश पर योवन आया है। गीत बसंत का हर दिल ने गाया है। सेमल, टेसू ने वन उपवन सजाया है बोर लगे आम ने तोरण द्वार बनाया है। लहलहाती फसलो ने फागुन को बुलाया है। बेर…

  • तेरी चाहत के सिवा | Teri Chahat ke Siva

    तेरी चाहत के सिवा ( Teri Chahat ke Siva )   कई काम हैं और भी जिंदगी में तेरी चाहत के सिवा वक्त की पेचीदगी ने सोचने की मोहलत ही दी कहाँ आरजू तो थी बहुत तेरी बाहों में सर रखने की कमबख्त कभी तकदीर तो कभी खामोशी भी दगा दे गई तेरे आंचल से…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *