Kavita Sanatan Dharm Hamara

सनातन धर्म हमारा | Kavita Sanatan Dharm Hamara

सनातन धर्म हमारा

( Sanatan Dharm Hamara )

 

चिन्मयी पुंज,सनातन धर्म हमारा
*********
सृष्टि संग अवतरण बिंब,
अनंत अनुपमा आह्लाद ।
मानवता श्री वंदन सेतु,
आनंदिता परम प्रसाद ।
वेद आभा अंतर्निहित,
अविरल ओजस्विता धारा ।
चिन्मयी पुंज,सनातन धर्म हमारा ।।

नैतिकता दिव्य रंग रुप,
अपार आस्था सत्कार ।
धर्म कर्म पुनीत रश्मियां,
जीवन हर स्वप्न साकार ।
आसुरी हाव भाव पर,
सदा चढ़ा प्रतिशोध पारा ।
चिन्मयी पुंज,सनातन धर्म हमारा ।।

प्रभु राम आदर्श मर्यादा ,
श्री कृष्ण अर्जुन उपदेश ।
मां सीता सी विमल शीलता,
जगदंबे सा प्रतिकार आवेश ।
हनुमान जी जप तप बल,
ब्रह्मांड गूंज शिव ओंकारा ।
चिन्मयी पुंज,सनातन धर्म हमारा ।।

साधना आराधना शिखर बिंदु,
शोभित सात्विक आचरण ।
स्नेह प्रेम भक्ति श्रृंगार,
आलौकिक शक्ति आवरण ।
मनुज स्वाभिमान शीर्ष ध्येय,
बुलंद सदा हिंदुत्व जयकारा ।
चिन्मयी पुंज,सनातन धर्म हमारा ।।

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/kavita-prem-palega-jab-antas-mein/

Similar Posts

  • चल छोड़ दे दारू | Kavita chal chhod de daru

    चल छोड़ दे दारू ( Chal chhod de daru )   चल छोड़ दे दारू जरा तू फोड़ दे बोतल। मत लड़खड़ा प्यारे संभल संभल के चल। करना है नशा तो कर जरा तू स्वाभिमान का। धरती का लाल सपूत अन्नदाता किसान सा। अभिमान का त्याग करके संभाल अपनों को। शुभ कर्म कर संसार में…

  • एडोल्फ हिटलर | Adolf Hitler

    एडोल्फ हिटलर ( Adolf Hitler ) प्रेम की प्यास में व्याकुल एक नवयुवक ऑस्ट्रिया की गलियों में घूमा करता। काश कोई तरुणी उसके दर्द को समझ पाती और करती प्रेम तो वह महान खून का प्यासा ना बनता तानाशाह। प्रेम की व्याकुलता लाती विछिप्तता उसी व्याकुलता में एक दिन अपनी प्रेयसी की याद को सीने…

  • वजूद | Vajood

    वजूद ( Vajood )    आज में ही गुम न रहो इतना कि  कल तुमसे तुम्हारा रूठ जाए आज तो आएगा फिर आज के बाद ही संभव है कि कहीं कल तुमसे छूट न जाए समेट लो खुशियां बाहों में अपनी मगर बचाते भी रहो कल के खातिर आज ही कीमती नही तुम्हारे लिए बेहतर…

  • श्री चरण | Shree Charan

    ” श्री चरण “ ( Shree charan )    श्री गिरिधर दीजिए , मुझे श्री चरणों में निवास । बड़ा कठिन रहा विरह तुमसे , मिलन की गिरधर तूझसे आस ।। चरण पखारे जिनके यमुना नित, जिन पर श्री राधा रानी प्रेम लुटाएँ । मीरा भक्ति करें मग्न हो जिनकी , सुदामा सा मित्र जिन्हें…

  • संविधान का निर्माता | Samvidhan ka Nirmata

    संविधान का निर्माता ( Samvidhan ka nirmata )    ख़ुदा का नूर बनकर आया वह संविधान का निर्माता, सबको समान अधिकार मिले जिनका ये अरमां था। चुप-चाप गरल पीता रहा पर दिलाकर रहा समानता, ख़ुद पढ़ो फिर सबको-पढ़ाओ ऐसा जो कहता था।। तुम आज झुक जाओ कागज की पुस्तकों के सामने, फिर कल को देखना…

  • लौटआओगे तुम | Love Kavita

    लौट आओगे तुम ( Laut aaoge tum )   याद है एक बर्फीली पहाड़ी शाम सफेद चादर सी दूर तक फैली बर्फ देवदार के वृक्ष ठंडे ,काँपतें तुम्हारे हाथों की वो छूअन मात्र से पिघलने लगा मेरा रोम,रोम आँखों में तेरी मदहोशी लवों पर मुस्कान कानों में गूँजती वो निश्चल हँसी खो गये जो पल…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *