एडोल्फ हिटलर | Adolf Hitler

एडोल्फ हिटलर

( Adolf Hitler )

प्रेम की प्यास में व्याकुल

एक नवयुवक

ऑस्ट्रिया की गलियों में

घूमा करता।

काश कोई तरुणी

उसके दर्द को

समझ पाती

और करती प्रेम तो

वह महान खून का प्यासा

ना बनता तानाशाह।

प्रेम की व्याकुलता

लाती विछिप्तता

उसी व्याकुलता में

एक दिन

अपनी प्रेयसी की याद को

सीने में दबाएं

स्वयं को नष्ट कर लिया ।

दुनिया ने कहा

बहुत खूंखार था

उसका नाम जुबा पर मत लो।

निर्णय हमें करना है

वह खूंखार था या

प्रेम का प्यासा!

योगाचार्य धर्मचंद्र जी
नरई फूलपुर ( प्रयागराज )

यह भी पढ़ें :-

अल्बर्ट आइंस्टीन | Albert Einstein

Similar Posts

  • हद से ज्यादा फूलो मत | Geet phoolo mat

     हद से ज्यादा फूलो मत ( Had se jyada phoolo mat )     गफलत मे रह झूलो मत, मर्यादा कभी भूलो मत। हद से ज्यादा फूलो मत, अपनों को भी भूलो मत। मर्यादा कभी भूलो मत अपने अपने ही होते हैं, अतुलित प्रेम भरा सागर। मोती लुटाते प्यार भरा, अपनों से ही मिलता आदर।…

  • कलम | Kalam

    कलम ( Kalam ) हाँ, मैं कलम हूँ रहती हूँ मैं उंगलियों के मध्य लिख देती हूं कोरे कागज पर जो है मेरी मंजिल पर खींच देती हूँ मैं टेढ़ी-मेढ़ी लाइनों से मानव का मुकद्दर छू लेता है आसमां कोई या फिर जमीं पर रह जाता है या किसी की कहानी या इबारत लिख देती…

  • श्री रामवतार जी | Shri Ramvatar Ji

    श्री रामवतार जी ( Shri Ramvatar Ji )   श्री रामवतार जी,प्रेरणा पुंज आदर्श शिक्षक पर्याय ************* स्नेहिल व्यक्तित्व प्रेरक कृतित्व , शोभना शिक्षा विभाग राजस्थान । परम शिक्षक पद सेवा स्तुति, सरित प्रवाह स्काउटिंग प्रज्ञान । कर्तव्य निष्ठ अनूप नैतिक छवि, शिक्षण अधिगम नव अध्याय । श्री रामवतार जी,प्रेरणा पुंज आदर्श शिक्षक पर्याय ।।…

  • ग्रहों का कुंभ

    ग्रहों का कुंभ नीलाभित नभ में लगा, कुंभ ग्रहों का मीत।रूप राशि शशि को पुलक शुक्र निहारे रीत।। दिनकर हँस स्वागत करे, उषा रश्मि शुभ स्नान।सिंहासन आसीन गुरु, पा श्रद्धा-सम्मान।। राई-नौन लिए शनि, नजर उतारे मौन।बुध सतर्क हो खोजता, राहु-केतु हैं कौन? मंगल थानेदार ने, दिया अमंगल रोक।जन-गण जमघट सितारे, पूज रहे आलोक।। हर्षल को…

  • शिव शिव बोल ज्ञान पट खोल | Shiv Shiv Bol

    शिव शिव बोल ज्ञान पट खोल ( Shiv Shiv Bol Gyan Pat Khol )    शिव शिव बोल ज्ञान पट खोल। हर हर भज नर नाम अनमोल। बाबा भोलेनाथ जय महाकाल। गंगा जटा सोहे चंद्र सोहे भाल। त्रिनेत्र त्रिशूलधारी नीलकंठ त्रिपुरारी। भस्म रमाए शिवशंकर बाघाम्बर धारी। डम डम डमरू बाजे नटराज नृत्य धारे। बिल्व पत्र…

  • समझो तो जग में हर कोई अपना | Samjho to

    समझो तो जग में हर कोई अपना ( Samjho to jag mein har koi apna )    समझो तो जग में हर कोई अपना समझो तो यह एक प्यारा सपना समझो जरा रिश्तो की पावन डोर समझो यह महकती सुहानी भोर प्यार के वो मधुर मधुर तराने अनमोल मोती स्नेह के बहाने अपनापन अनमोल जताकर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *