जिंदगी की लघु कहानी

जिंदगी की लघु कहानी

जीवन में जिंदगी जीना उतना आसान भी नहीं है हर एक मोड़ पर नाना तरह की चुनौतियां, सुरसा की तरह मुंह खोल खड़ी रहती है। जीवन को चलते-चलते राहों में हर किसी से सामना करनी पड़ती है।

कभी आंधी, तूफान, सुनामी जैसा लहरों से भी सामना जिंदगी को ,हर पल एक नया जंग, नया संघर्ष से जूझना पड़ता है। दुनिया भी कम नहीं हे जरा हलका पांव तो उड़ाने की कोशिश में लगी रहती है।

यही जिंदगी की कहानी। नदी की दो किनारा सुख दु:ख के बीच धारा के बीच जिंदगी निरंतर बहती रहती है। कभी-कभी भंवर में भी फंस जाते हैं। मगर ऐसी स्थिति में भगवान को स्मरण कर बाहर निकालने की कोशिश। इसी तरह गिरते-उठाते जिंदगी की सफर गंतव्य तक पहुंचती।

कभी अच्छे कर्मों की सफलता का झंडा हाथों में, बढ़ती शोभा जिंदगी में। मिलती आनंद,खुशियां भरपूर है। यही लघुत्तम रूप में जिंदगी का राज। किसी-किसी भाग्यशाली को जीवन में खुशियां,आनंद ही जायदा मिलती ।

कोई-कोई जीवन जीने की कला की निपुणता लेकर भगवान की घर से धरातल पर पदार्पण होते हैं । अच्छे लोगों की सानिध्य मिलती है ऐसे में कुछ का जीवन सुगमता से चलता है। मगर कुछ भी हो जो जीता जिंदगी से वही सिकंदर है।

भानुप्रिया देवी
बाबा बैजनाथ धाम देवघर

यह भी पढ़ें :-

भविष्यफल का मायाजाल | Kahani Bhavishyafal ka Mayajaal

Similar Posts

  • परिवार का मुकुट | Laghu Katha

    अनिता ने जीवन में बहुत संघर्ष किया था। उसने व्यवसाय में कड़े संघर्ष के बाद अपने ससुर के व्यवसाय को नयी ऊंचाईयों तक पहुंचाया था। उस का सम्मान समारोह था। समारोह में विविध लोगों ने रिश्तेदारों ने अनिता को सफलता के लिये बधाइयां दी थी। उस के व्यक्तित्व की प्रशंसा की थी। अनिता के ससुर…

  • मुझको पहचाने | Mujhko Pahchane

    मुझको पहचाने  ( Mujhko Pahchane ) हवा में ऐसे उड़ाऊँगा अपने अफ़साने ज़माने भर का हरिक शख़्स मुझको पहचाने मिज़ाजे-दिल भी कहाँ तक मेरा कहा माने छलक रहे हैं निगाहों से उसकी पैमाने मुझे सलाम यूँ करते हैं रोज़ रिंदाने बुला बुला के पिलाते हैं मुझको मैख़ाने मैं महवे जाम न होता तो और क्या…

  • क्योंकि वो मां थी | Kahani Kyonki wo Maa Thi

    घर में सन्नाटा छाया हुआ था। सभी एक दूसरे का मुंह देख रहे थे। कोई किसी से कुछ बोल नहीं रहा था । अब क्या होगा? ऐसा क्यों किया ? जैसे विचार सबके मन में आ जा रहे थे। बात दरअसल यह थी कि मनीष ने कर्ज ले लिया था । कर्ज लेते समय घर…

  • द्वंद | Dvand

    वैसे वह एक हट्टा कट्टा नौजवान है । उसे जिम जाने का शौक बचपन से है । क्या मजाल किसी को की उसको कोई नीचा दिखा कर चला जाए? मोहल्ले में ऐसी धाक जमाया है पट्ठा कि पूछो मत। सब उसे देवता समझते हैं देवता। परंतु इस देवता के हृदय में जलने वाली अग्नि को…

  • |

    पुनर्विवाह | Punar vivaah film script

    एक लड़की, पलक | अमृतसर मे, अच्छे जीवनसाथी पाने के लिए माथा टेक रही है, तभी पीछे दो लड़के अलग-अलग शहरों से आये (1>पवन {अनाथ अमीर,बिजनेश}) और (2> पुनीत {मिडिल परिवार,जॉब}) पलक के अगल-बगल बैठ माथा टेक, अपने घर की सुख-शांती और सुन्दर सुशील जीवन साथी की कामना की दर्शन कर पलटे, तो पलक को…

  • गणतंत्र दिवस

    एक छोटे से गाँव में एक छोटा लड़का रहता था, जिसका नाम रोहन था। गणतंत्र दिवस नजदीक था। रोहन की बड़ी बहन मोनी गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशभक्ति गीत सुनाने की घर पर तैयारी कर रही थी। रोहन को बार बार गणतंत्र दिवस का नाम सुनने को मिल रहा था। वह समझ नहीं पा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *