फूल तितली सनम हुए बे-रंग

फूल तितली सनम हुए बे-रंग

क़ाफ़िया – ए स्वर की ‌बंदिश
रदीफ़ – बे-रंग
वज़्न – 2122 1212 22

फूल तितली सनम हुए बे-रंग
इंद्रधनुषी छटा दिखे बे-रंग

तेरी खुशबू जो ज़िंदगी से गई
रात-दिन मेरे हो गए बे-रंग

ये मुहब्बत सज़ा बनी है आज
दौर-ए-हिज़्राँ लगे मुझे बे-रंग

याद जब तेरी आती है मुझको
बेवफ़ा, हर वफ़ा लगे बे-रंग

मौत रस्ता नहीं जुदाई का
ज़िंदगी तेरी हो भले बे-रंग

ख्वाब इक टूटने का ऐसा दर्द
ख्वाब आते हैं सब मुझे बे-रंग

साथ में ज़ीस्त जो गुज़ारी है
हिज्र के जिस्म को छुए बे-रंग

हर सफ़र तय किया हूँ ज़ीस्त का मैं
लम्हें-लम्हें रुला दिए बे-रंग

ज़िंदगी नाम मौत का ले रही
रंग “बिंदल” तभी हुए बे-रंग

Vikas Aggarwal

विकास अग्रवाल “बिंदल”

( भोपाल )

यह भी पढ़ें :-

मुझको पसंद करते हैं लाखों हजार लोग

Similar Posts

  • दुनिया के

    दुनिया के भाग फूटे पड़े हैं दुनिया के।पांव उखड़े पड़े हैं दुनिया के। खेल बिगड़े पड़े हैं दुनिया के।दाम उतरे पड़े हैं दुनिया के। दौर कैसा है यह तरक़्क़ी का।काम सिमटे पड़े हैं दुनिया के। जिस तरफ़ देखिए धमाके हैं।ह़ाल बिगड़े पड़े हैं दुनिया के। बन्दिशों के अ़जब झमेले हैं।हाथ जकड़े पड़े हैं दुनिया के।…

  • एक नगमा प्यार का | Poem Ek Nagma Pyar ka

    एक नगमा प्यार का ( Ek nagma pyar ka )    आ गए तो रस्म़ महफ़िल की निभाते जाइए एक नग़मा प्यार का सबको सुनाते जाइए। कौन है क्या कह रहा अब फ़िक्र इसकी छोड़िए मुस्कुराकर दिल रक़ीबों का जलाते जाइए। दो जहां को छोड़ दें हम आपकी ख़ातिर सनम है फ़क़त ये शर्त की…

  • साथ जिनके | Ghazal Saath Jinke

    साथ जिनके ( Saath Jinke ) हाँ वही खुशनसीब होते हैं साथ जिनके हबीब होते हैं अपनी हम क्या सुनाये अब तुमको हम से पैदा गरीब होते हैं तुमने देखा न ढंग से शायद किस तरह बदनसीब होते हैं पास जिनके हो रूप की दौलत उनके लाखों रक़ीब होते हैं प्यार जिनको हुआ नहीं दिल…

  • दर्द के दौर में | Dard Ke Daur Mein

    दर्द के दौर में  ( Dard Ke Daur Mein ) मौत थीं सामने ज़िन्दगी चुप रही दर्द के दौर मैं हर खुशी चुप रही जिसकी आँखों ने लूटा मेरे चैन को बंद आँखें वही मुखबिरी चुप रही दीन ईमान वो बेच खाते रहे जिनके आगे मेरी बोलती चुप रही बोलियां जो बहुत बोलते थे यहाँ…

  • उदासियाँ | Udasiyan

    उदासियाँ ( Udasiyan ) बैठी हैं हर क़दम पे डगर पर उदासियाँकैसे हो अब गुज़र, मेरे दर पर उदासियाँ मायूस होके लौटे जो उनकी गली से हमछाईं हमारे क़ल्ब-ओ-जिगर पर उदासियाँ क्या हाल आपसे कहें क़हर-ए-खिज़ां का हमसूखी है डाल-डाल शजर पर उदासियाँ दिखता नहीं लबों पे तबस्सुम किसी के अबछाई हुई हैं सबकी नज़र…

  • इस जहाँ से मुझे शिकायत है

    इस जहाँ से मुझे शिकायत है इस जहाँ से मुझे शिकायत हैक्यों दिलों में यहाँ हिकारत है गुल खिला लो अभी मुहब्बत केजान जाओ यही इबादत है क्यों किसी से करें मुहब्बत हमजब सभी की लुटी शराफ़त है उँगलियाँ वक्त पर करो टेड़ी ।ये पुरानी सुनो कहावत है प्यार करना कोई गुनाह नहींधोखा देना बुरी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *