मैं तुम्हारे प्रेम में

मैं तुम्हारे प्रेम में

मैं तुम्हारे प्रेम में

 

 

मैं तुम्हारे प्रेम में

तुम्हारे हाथ की

मेहंदी होना चाहता हूं

जो तुम्हारे हाथों को भी महकाए

और

मेरे दिल को भी बहकाए…..!

 

तुम्हारे प्रेम में

मैं तुम्हारे हथेली में बने

गहरे लाल सुर्ख़

टीके का रंग

होना चाहता हूँ

जो अपने प्रेम को

ओर भी गहरा बनाए…….!

 

तुम्हारे प्रेम में

मैं तुम्हारी अंगुलियों के

पोरों पर बने

रंग के समान

तुममें रंगना चाहता हूँ

जो अपने प्रेम को

रंगीन बनाए……!!

 

❣️

कवि : सन्दीप चौबारा

( फतेहाबाद)

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बैठ जाता हूँ

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