डॉ राजेन्द्र प्रसाद का जन्मदिन

डॉ राजेन्द्र प्रसाद का जन्मदिन

डॉ राजेन्द्र प्रसाद का जन्मदिन

********

आज जन्मदिन है
बाबू राजेंद्र की
उपलक्ष्य में इनके
मन रही है मेधा दिवस भी।
शत् प्रतिशत अंक यही लाए थे
परीक्षक को भी चौंकाए थे
परीक्षार्थी परीक्षक से है उत्तम
इसलिए अंक दे रहा हूं महत्तम
ये टिप्पणी थी परीक्षक की
उन्हें भी लोहा माननी पड़ी
बाबू राजेंद्र के मेधा की।
जिला स्कूल छपरा से पढ़कर
निकला यह होनहार
आगे चलकर बना देश का
यही तो खेवनहार।
संविधान सभा के बने अध्यक्ष
चुने गए प्रथम राष्ट्रपति
इनके नेतृत्व के बल पर ही
भारतीय संविधान ने अपनी आकार ली।
स्वतंत्रता आन्दोलन में लिया अंग्रेजों से लोहा
आजादी की चिंगारी को इन्होंने दी थी हवा।
सादगी सद्भाव की थे ये मिशाल,
कानून और राजनीति में थे बेमिसाल।
सर्वोच्च आसीन होते हुए भी
रहते थे अति साधारण
इनकी खूबियों को देखकर
बारंबार नमन करे मेरा मन।
बाबू राजेंद्र प्रसाद को
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं
ईश्वर हमें भी उनके बताए मार्ग पर
चलना सिखाएं…

?

नवाब मंजूर

लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

यह भी पढ़ें : 

पौधा संरक्षण है जरूरी

Similar Posts

  • शिक्षक न होते | Shikshak na Hote

    शिक्षक न होते ( Shikshak na hote ) शिक्षक ना होते तब क्या होता ? ये सुंदर , सभ्य संसार ना होता । होने को सब कुछ होता पर , विज्ञान का विस्तार ना होता । फूल भी होती , बाग भी होता , पर वो खुशबूदार ना होता । शिक्षक से ही सुगंध है…

  • पुस्तक | Pustak

    पुस्तक  ( Pustak )    गिरने मत दो     झुकने मत दो          गिरे अगर तो                उसे उठा लो,   मुड़ने मत दो     फटने मत दो         मुड़े अगर तो              उसे सधा लो,   भीग भीग कर      गल न जाए          जल वर्षा से               उसे बचा लो,   कट ना…

  • रण में केशव आ जाओ | Kavita

    रण में केशव आ जाओ ( Ran mein keshav aa jao )   चक्र सुदर्शन धारण करके अब रण में केशब आ जाओ जग सारा लड़ रहा अरि से विजय पताका जग फहरावो   साहस संबल भरके उर में जन जन का कल्याण करो सब  को  जीवन  देने वाले माधव  सबके  कष्ट  हरो   हर…

  • प्यारे बच्चे | Kavita Pyare Bache

    प्यारे बच्चे ( Pyare Bache ) मन के सच्चे प्यारे बच्चे, हर जिद को रोकर मनवा लेते, शैतानी में शैतान के बप्पा, फिर जिद से हर काम करा लेते। बातें ऐसी मन को मोहें, वीर भाव से लोहा लें। नंग-धडंग घूमते घर में, इटली दो, पोहा पर लोटें। ऐसी हालत घर का बनाए, मेहमान भी…

  • उड़ान हौसलों की | Udaan Hauslon ki

    उड़ान हौसलों की ( Udaan hauslon ki )   जरूरी नही की स्वयं पर उठे हर सवालों का जवाब दिया ही जाय जरूरी है की उठे सवालों पर गौर किया जाए.. प्रश्न तो हैं बुलबुलों की तरह हवा के मिलते ही बिलबिला उठते हैं सोचिए की आपका बैठना किस महफिल मे है… किसकी आंखों ने…

  • गर है लिखने का शौक | Kavita

    गर है लिखने का शौक ( Gar hai likhne ka shauq )   गर है लिखने का शौक तो कविता चुपचाप चली आती है। टूटे-फूटे शब्दों में भी भावनाएं निकल जाती है। हम तो मिश्रित भाषी हैं कभी हिंदी कभी सिंधी कभी पंजाबी कभी गुजराती निकल जाती है। भाषा के झरोखों से दिल की ऋतु…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *