हसरत | Kavita Hasrat

हसरत

( Hasrat )

मेरे दिल की किसी धड़कन में
तेरी याद रहती है।
कहीं जिंदा हैं वो लम्हे
जिन्हें पल पल ये कहती है।
चले आओ जरा बैठें
हम उसी घाट पे चलके !
जहां की लहरों में अब भी
तेरी तसवीर रहती है ।।

के मुझको तो गिला कोई नहीं
तेरी रुसवाई का ।
मेरे हिस्से में आया है सिला
मेरी आशनाई का।
के तोहमद हम किसे दें
ये जरा हमको बता दो तुम।
क्या टूटे आइने की भी
कोई तकदीर होती है।।

कभी लैला मिली हो गर
किसी मजनूं को तो जानूं।
कभी डोली हो उतरी हीर की
घर रांझे के मानूं।
जो मनके प्यार की माला के
कभी ना टूट के बिखरें।
तो सच्चे मोतियों सी आब
कहां फिर प्यार में होती है।।

सुना है रूहों के चमन में भी
गुल प्यार के खिलते हैं।
दफ़न हो हसरत जिनके दिल में
वो अगले जन्म मिलते हैं।
तेरे दीदार की चाह में न जाने
क्या क्या किया हमने।
कब्र में भी खुली आंखें
तेरे इंतज़ार में रहती हैं।।

डॉ. जगदीप शर्मा राही
नरवाणा, हरियाणा।

यह भी पढ़ें :-

समय के लम्हे | Kavita Samay ke Lamhe

Similar Posts

  • वो फिर खत लिखने का जमाना आ जाए | Khat par Kavita

    वो फिर खत लिखने का जमाना आ जाए ( Wo phir khat likhne ka zamana aa jaye )    वो फिर खत लिखने का जमाना आ जाए तुम्हारी याद मुझको फिर तरोताजा करा जाए, दिल की धड़कन ना पूछो कितनी तेज हो जाए पैगाम में तेरी खुशबू का एहसास वो करा जाए शब्दों को पढ़ते पढ़ते…

  • सुुुनो | Poem suno

    सुुुनो ( Suno )   सुुुनो… वो बात जो थी तब नहीं है अब जब आँखों में छिपी उदासियाँ पढ़ लेते थे लबों पर बिछीं खामोशियाँ सुन लेतेे थे ….तुम फुर्सतों में भी अब वो बात नहीं वो तड़प, वो ललक नहीं है  मसरूफियात में भी हमारी याद से लरज़ जाते थे जब…..तुम सुनो… तब…

  • कितना सहा होगा | Vedna kavita

     कितना सहा होगा  ( Kitna saha hoga)   कितना सहा होगा उन गर्भवती औरतों ने सड़क पर चलते हुए दर्द नंगे पैरों ,उखड़े कदमों से भूखे पेट और उतरे चेहरे से।। कितनी पीड़ा सही होगी सड़क पर बच्चे को जन्म देते हुए न कोई बिस्तर, न कोई दवा काट कर नाल बच्चे का टपकते अंगों…

  • 75 वां गणतंत्र दिवस | 75th Republic Day

    75 वां गणतंत्र दिवस   गणतंत्र दिवस की वैला पर आत्मा का “प्रदीप” जला ले ।।ध्रुव॥ गणतंत्र दिवस पर्व पर मन का भार मिटा ले । सदा सहजता से जीकर जीने का सार निकाल ले । हम स्वयं अपने भाग्य विधाता सुख दुःख के निर्माता । हम अपने त्राणों से हमारी स्वयं की शरण के…

  • Kavita | गजगामिनी

    गजगामिनी ( Gajagamini )   मन पर मेरे मन रख दो तो,मन की बात बताऊं। बिना  तेरा  मै  नाम  लिए ही, सारी बात बताऊं। महफिल में कुछ मेरे तो कुछ,तेरे चाहने वाले है, तेरे बिन ना कटते दिन, हर रात की बात बताऊं।   संगेमरमर  पर  छेनी  की,  ऐसी  धार ना देखी। मूरत जैसे सुन्दर…

  • समर | Samar

    समर ( Samar )    हर दर्द की दवा नहीं मिलती हर डालियों में फूल नहीं खिलते हर चमन से आती है बहार, मगर हर चमन को माली नहीं मिलते कभी और से तो कभी खुद से भी सफल शुरू करना जरूरी होता है जरूरी है उजाला भी रात के अंधेरे में मगर चांद से…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *