hariyali teej

हरियाली तीज पर्वोत्सव

हरियाली तीज पर्वोत्सव

हाथों की मेंहदी, आँखों का काजल,
तीज का त्यौहार, बरसते नेह बादल ।

सावन मनभावन दिल का लुभावन
सलामत रहे सजना, हूँ व्रत तीज पावन ।

कंगन चूड़ी खनके, प्रेम रस भरके
शिव-पार्वती की जैसे जोड़ी बनके ।

पैरों में पाजेब महावर, माथे बिन्दी सजती रहे
मांग में सिन्दूर विराजे प्रतिभा गीत गाती रहे ।

मेरा सोलह श्रृंगार सईया के लिए
व्रत हूँ पावन तीज त्यौहार सईया के लिए ।

तन, मन, धन सब तुझपर अर्पित करती हूँ
कर्म, वचन, से तुमको अपना वरण करती हूँ ।

चलता रहे खुशहाल जीवन हृदयपूर्ण स्नेहिल
मिलता रहे प्रेम से प्रेम का यूंही मंजिल ।

तीज व्रत रखा मैंने अन्न जल त्याग,
शिव पार्वती जोड़ी जैसे बनती खास।

दीर्घायु हो साजन, ऐसा वरदान मिले,
सदा सुहागन का मुझे सौभाग्य मिले….।

प्रतिभा पाण्डेय “प्रति”
चेन्नई

यह भी पढ़ें :-

नर से नारायण | Kavita Nar se Narayan

Similar Posts

  • लहजा | Lehja

    लहजा ( Lehja )   ऐ जिंदगी! सीख रही हूँ जीने का लहजा थोड़ी देर तू जरा और ठहर जा हर शाम खुद को खोज रही हूँ हर रिश्ते के राज समझ रही हूँ ढलते सूरज से धीरज सीख रही हूँ तारो से झिमिलाना सिख रही हूँ ख्वाबों की मुट्ठी खोल रही हूँ धीरे धीरे…

  • भारतरत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी

    भारतरत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी आदर्शों पर अटल हिमालय, सी जिनकी इच्छा शक्ति,कर्त्तव्य पथ पर अडिग, अकम्प आदर्श देश भक्ति,अटल विचारों के स्वामी, सत्य पथिक विहारी थे,ऐसे अटल बिहारी करते नाम की सार्थक अभिव्यक्ति! नवयौवन में गृहत्याग समर्पित, देश को जीवन कर डाला,मानवता की सेवा करने, निस्वार्थ राजधर्म पाला,स्वतंत्रता संग्राम में बढ़ चढ़, जन चेतना…

  • हैप्पी न्यू ईयर

    हैप्पी न्यू ईयर     हैप्पी न्यू ईयर बोल उठी गांव शहर की हर गलियां नव वर्ष आते ही खिल उठी गांव शहर की हर गलियां फूल खिल महक उठी जगत की गांव शहर की हर गलियां , गुलाबों ने भी है तोड़ी अपनी अपनी चुप्पियां,  सौगात इजहार कर गया है गांव शहर की हर…

  • कागा कारवां | Kaga Karvan

    हिंदी है हम हिंदी है हम हिंदी राष्ट्र भाषा हमारी लिखना पढ़ना हिंदी में राष्ट्र भाषा हमारी हिंदी आन बान शान जान ज़ुबान आलीशान रोम रोम में बहती धारा भाषा हमारी हर शब्द में प्रेम की ख़ुशबू पावन कल कल करती रस धारा भाषा हमारी बोल चाल में खिलते दिल के कंवल आनंद की चलती…

  • मत मार पिचकारी | Kavita Mat Mar Pichkari

    मत मार पिचकारी ( Mat Mar Pichkari )   मत मार पिचकारी, मेरी भीगी चुनरिया सारी। रंग मत डारे रे सांवरिया, मोहन मदन मुरारी। रंग गुलाल उड़े फागुनी, मधुर बजे मुरली थारी। झूम झूम गुजरिया नाचे, नाच रही राधा प्यारी। चंग बजे बांसुरी की धुन, मस्त हुई दुनिया सारी। रसिया मोहन प्यारे आजा, धूम मच…

  • पर्यावरण संरक्षण | विश्व पर्यावरण दिवस विशेष

    पर्यावरण संरक्षण पर्यावरण संरक्षण,आज जरूरी प्रकृति,पर्यावरण सखा हमारी, छेड़-छाड़ लाएगा, विभीषिका, कोरोना काल है दृष्टांत,भयंकर।।। वन,जंगल,वृक्ष,बगीचा,हितैषी, फल-फूल,इंधन,डालपात,ऋषि संजीवनी बुटी,औषधी, भंडार, पर्यावरण से मिले,सुकून,उपहार।।। पीपल,बरगद,तुलसी,मूल्यवान, जरा,आधि,व्याधि,निजात धन वातावरण रहे ठंडा,उर्जावान, पथिक को मिले हवा,छाया,रमण।। वृक्ष सहायक लाने मानसून,राम कटाई से जलसंकट का ख़तरा, जन-जीवन के आगे चुनौती, व्यष्टि नहीं समष्टि से,निदान।।। शहरीकरण से इजाफ़ा,उद्योग, प्रदूषण बढ़ता,सांस…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *