हमें होश ऐसे भुलाए गए हैं

हमें होश ऐसे भुलाए गए हैं

हमें होश ऐसे भुलाए गए हैं।
निगाहों से साग़र पिलाए गए हैं।

सितम हम पे ऐसे भी ढाए गए हैं।
हंसा कर भी अक्सर रुलाए गए हैं।

जिन्हें देखकर ताब खो दे ज़माना।
वो जलवे भी हम को दिखाए गए हैं।

जो चाहो करो हम से बरताव यारो।
हम आए नहीं हैं बुलाए गए हैं।

उन्हें सब्र आए तो आए भी कैसे।
भरी बज़्म से जो उठाए गए हैं।

सलीक़े थे ऊंची उड़ानों के जिनको।
यहां पर उन्हीं के जलाए गए हैं।

दर-ए-साक़िया पर झिझक है ये कैसी।
यहां तो फ़राज़ आप आए गए हैं।

सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़

पीपलसानवी

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • आपका ह़ुस्न-ए-क़यामत | Aap ka Husn-e-Qayamat

    आपका ह़ुस्न-ए-क़यामत ( Aap ka Husn-e-Qayamat ) आप का ह़ुस्न-ए-क़यामत आह हा हा आह हा। उस पे यह रंग-ए-ज़राफ़त आह हा हा आह हा। देख कर तर्ज़-ए-तकल्लुम आप का जान-ए-ग़ज़ल। मिल रही है दिल को फ़रह़त आह हा हा आह हा। फूल जैसे आप के यह सुर्ख़ लब जान-ए-चमन। उन पे फिर लफ़्ज़-ए-मुह़ब्बत आह हा…

  • हर दिन | Har Din

    हर दिन ( Har din )    ज़िन्दगी हर दिन एक नयी चाल है इंसा दिन-ब-दिन हो रहा बेहाल है। कोई चराग बन जल रहा हर पल जाने किसका घर करे उजाल है। जो खो गया नाकामयाबी में कहीं देता कहाँ कोई उसकी मिसाल है। ख्वाहिशों का अपनी बोझ ढोते ढोते हर दिन वो कितना…

  • ऐतबार रखना तू | Aitbaar Shayari

    ऐतबार रखना तू ( Aitbaar rakhna tu )   ज़रा दिल मेरी तरह बेक़रार रखना तू ? वफ़ा मुहब्बत में ही इंतिज़ार रखना तू कभी शक करना नहीं वफ़ा मुहब्बत पर वफ़ाओ पर उम्रभर ऐतबार रखना तू परायी करना नहीं तू मुझे दिल से अपने बसाकर दिल में हमेशा यार रखना तू बदल न जाना…

  • हमेशा रहे बेसहारों में शामिल

    हमेशा रहे बेसहारों में शामिल रहे तनहा होकर हज़ारों में शामिलहमेशा रहे बेसहारों में शामिल सदा ही रही है ख़ुशी दूर हमसेरहे हम सदा ग़मगुसारों में शामिल नहीं बन सके हम महाजन कभी भीसदा ही रहे देनदारों में शामिल ज़मीं पे मिलन हो न पाया हमाराचलो होंगे अब हम सितारों में शामिल मिली हमको मन…

  • काश ऐसा कमाल हो जाए | Kaash Aisa Kamaal ho Jaye

    काश ऐसा कमाल हो जाए ( Kaash Aisa Kamaal ho Jaye ) काश ऐसा कमाल हो जाए। उससे फिर बोलचाल हो जाए। वो अगर हम ख़याल हो जाए। ज़िंदगी बेमिसाल हो जाए। देखले गर उसे नज़र भर कर। पानी-पानी हिलाल हो जाए। उसके होंठों पे लफ़्ज़े हां हो तो। ह़ल मिरा हर सवाल हो जाए।…

  • दीद-ए-तर | Dida-e-Tar

    दीद-ए-तर ( Dida-e-Tar ) वो मेरे लिए दीद-ए-तर है के नहीं है।उल्फ़त का मिरी उसपे असर है के नहीं है। रस्मन तो उसे आना था फिर भी नहीं आया।उसको मिरे मरने की ख़बर है के नहीं है। तारीकियों इतना तो बता दो कभी मुझको।शाम-ए-ग़मे-हिज्रां की सह़र है के नहीं है। आजाऊंगा,आजाऊंगा इतनी तो ख़बर दो।मेह़फ़िल…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *