उनके होंठों पे थी हंसी कल शब

उनके होंठों पे थी हंसी कल शब

उनके होंठों पे थी हंसी कल शब।
रोशनी सी थी तीरगी कल शब।

चांद उतरा था अपने आंगन में।
हम पे बरसी थी चांदनी कल शब।

कुछ क़दम भी हमारे बहके थे।
कुछ हवा भी थी मधभरी कल शब।

जो भी कहना था कह दिया उनसे।
आ गई काम मयकशी कल शब।

मेरे सिरहाने कोई बैठा था।
दूर थी दिल से बेकली कल शब।

दाद देते न लोग थकते थे।
हमने की ऐसी शायरी कल शब।

हाय कैसे फ़राज़ बतलाएं।
हम पे तारी थी जो ग़शी कल शब।

सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़

पीपलसानवी

यह भी पढ़ें:-


Posted

in

by

Tags:

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *