मुझे ये बात | Mujhe ye Baat

मुझे ये बात

( Mujhe ye Baat )

मुझे ये बात लोगों ने कही है
गलत है तू मगर फिर भी सही है

नयी है और मज़बूत भी पर
न जाने क्यों इमारत ढह रही है

बिना तारीख़ वाली ज़िन्दगी की
कठिन मौखिक परीक्षा आज ही है

कुशल तैराक बनकर आज यारों
ग़ज़ल शब्दों के सागर में बही है

कुमार अहमदाबादी

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