मिला था निराली मधुर जिंदगी से

मिला था निराली मधुर जिंदगी से

मिला था निराली मधुर जिंदगी से

भ्रमर बाग में जब मिला था कली से
मिला था निराली मधुर जिंदगी से

सही और प्यारी सलाह दे रहा हूं
हुनर सीख चलने का चलती घडी से

कभी मैं कभी तू कभी ये कभी वो
मिलेंगे कसम से नयी रोशनी से

जरा गौर कर तू वहां देख प्यारे
खड़ा है सफल आदमी सादगी से

अगर मन में विश्वास श्रद्धा न होंगे
मिलेगा न कुछ भी तुझे बंदगी से

कुमार अहमदाबादी

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • तूफान उठाया है

    तूफान उठाया है इस दिल के समुंदर में तूफान उठाया हैमासूम निगाहों ने जब तीर चलाया है वो दिल के दरीचों से नज़दीक लगा इतनाइक पल में उसे हमने हमराज़ बनाया है ताउम्र रहे रौशन दहलीज़ तेरे घर कीयह दीप मुहब्बत का यूँ हमने जलाया है तुमने जो किया दिल को उम्मीद से वाबस्ताइक ताजमहल…

  • तयशुदा कागज़ों पर बयानी हुई | Ghazal Lines in Hindi

    तयशुदा कागज़ों पर बयानी हुई ( Tayashuda kagazon par bayani hui )   तयशुदा कागज़ों पर बयानी हुई हम ग़रीबों की क्या ज़िंदगानी हुई एक पागल ने खोले थे दिल के वरक़ सारी दुनिया मगर पानी-पानी हुई तेरी आँखों में अब भी है रंग-ए-हिना इतनी संजीदा कैसे कहानी हुई उनसे मिलते ही इतने दिये जल…

  • आज बीमार दिल की दवा ही नहीं

    आज बीमार दिल की दवा ही नहीं आज बीमार दिल की दवा ही नहीं ।क्या लबों पे किसी के दुआ ही नहीं ।। बन गये आज हैं वहसी इंसान सब ।क्या कहूँ आज उनमें खुदा ही नहीं ।। खत लिखे प्रेम के लाख जिसके लिए ।बाद उसमें सुना फिर वफ़ा ही नहीं ।। बात मेरी…

  • अश्क़ भी वो गिराने लगते हैं

    अश्क़ भी वो गिराने लगते हैं अश्क़ भी वो गिराने लगते हैंदूर जब भी हम जाने लगते हैं बातों में मुस्कराने लगते हैंहम उन्हीं के दीवाने लगते हैं जब कभी मिलते हैं सनम मुझसेतो अदा से रिझाने लगते हैं बात जिस दिन भी हो जाये उनसेदिन वही बस सुहाने लगते हैं याद आती है जब…

  • अपनी कहानी लिखना | Apni Kahani Likhna

    अपनी कहानी लिखना दिल के औराक़ पे जब अपनी कहानी लिखनादूध को दूध मगर पानी को पानी लिखना पढ़ तो लेता हूँ मैं तहरीर तेरे चेहरे कीदास्ताँ फिर भी कभी दिल की ज़ुबानी लिखना तेरे हाथों में है अब मेरे मुक़द्दर का वरक़मेरी रातों में उजालों की रवानी लिखना कैसे जलते हैं मेरे होंठ तेरी…

  • ज़मीरों की तिज़ारत | Zamiron ki Tijarat

    ज़मीरों की तिज़ारत ( Zamiron ki tijarat )   कुछ लोग ज़मीरों की तिज़ारत नहीं करते रंजिश में रक़ीबों की ख़िलाफ़त नहीं करते। ये दौर ज़रा फ़र्क ज़रा अजनबी सा है मतलब न हो तो लोग मुहब्बत नहीं करते। है फ़ितरतों में अपनी वफ़ा और अकीदत हम दोस्ती में यार सियासत नहीं करते। कब तक…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *