मिला था निराली मधुर जिंदगी से

मिला था निराली मधुर जिंदगी से

मिला था निराली मधुर जिंदगी से

भ्रमर बाग में जब मिला था कली से
मिला था निराली मधुर जिंदगी से

सही और प्यारी सलाह दे रहा हूं
हुनर सीख चलने का चलती घडी से

कभी मैं कभी तू कभी ये कभी वो
मिलेंगे कसम से नयी रोशनी से

जरा गौर कर तू वहां देख प्यारे
खड़ा है सफल आदमी सादगी से

अगर मन में विश्वास श्रद्धा न होंगे
मिलेगा न कुछ भी तुझे बंदगी से

कुमार अहमदाबादी

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • उनका किरदार | Unka Kirdar

    उनका किरदार ( Unka kirdar ) उनका किरदार है क्या उनको बताया जाये आइना अहले -सियासत को दिखाया जाये जलने वालों को ज़रा और जलाया जाये ख़ाली बोतल ही सही जश्न मनाया जाये ज़ुल्म ही ज़ुल्म किये जाता है ज़ालिम हम पर अब किसी तौर सितमगर को डराया जाये इस ग़रीबी से बहरहाल निपटने के…

  • ज़िन्दगी खत्म हुई | Poem Zindagi Khatam hui

    ज़िन्दगी खत्म हुई ( Zindagi khatam hui )    जिंदगी खत्म हुई उन्हें पुकारते हुए उनको जीतते हुए हमको हारते हुए क़ौल वो क़रार जो उन्हें तो याद भी नहीं बस उसी क़रार पर उमर गुज़ारते हुए । चार दिन के प्यार का चढ़ा हुआ जो कर्ज़ था हाथ कुछ बचा नहीं उसे उतारते हुए।…

  • रुख़ से चिलमन ज़रा क्या हटा दी

    रुख़ से चिलमन ज़रा क्या हटा दी रुख़ से चिलमन ज़रा क्या हटा दी।उसने बिजली सी दिल पर गिरा दी। ख़्वाबे ग़फ़लत में खोए हुए थे।जागे-जागे से सोए हुए थे।आन में रूबरू आ के हाए।नींद उसने हमारी उड़ा दी।रुख़ से चिलमन ज़रा क्या हटा दी।उसने बिजली सी दिल पर गिरा दी। मारे-मारे से फिरते थे…

  • जवानी | Jawani Shayari

     जवानी (  Jawani )    छीन न ले डरता हूँ फिर से होश जवानी जगा रही है दिल में फिर से जोश जवानी बात करो फूलों ,तितली,परबत नदिया से अच्छी नहीं लगती है ये ख़ामोश जवानी महबूबा ने वस्ल का वादा अगर किया हो बन जाती है फिर तो ये ख़रगोश जवानी लाखों काँटे हैं…

  • दुआ से | Dua se

    दुआ से ( Dua se )    रोज़ करता हूँ दुआ मैं वो ख़ुदा से अब शिफ़ा मिले तेरी रब दवा से रब बनाए रख नज़र ऐ रोज़ मुझपर दूर हर पल मैं रहूँ रब हर बला से जिंदगी से दूर खुशियाँ हुई यूं हाँ नमाजो की यहाँ यारों क़ज़ा से हो गया हूँ आज…

  • भीड़ भक्तों की मय्या तेरे द्वार है

    भीड़ भक्तों की मय्या तेरे द्वार है भीड़ भक्तों की मय्या तेरे द्वार हैइनकी कश्ती फँसी आज  मझधार है जब भी भक्तों पे संकट की आई घड़ीदुर्गे माँ ने लिया तब ही अवतार है दैत्य दानव दरिंदों के संहार कोमाँ उठाती सदा अपनी तलवार है झूमते नाचते धुन पे गरबे की सबहर्ष उल्लास भरता ये …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *