प्रेरणा | लघुकथा

झुग्गी में रहने वाली संध्या बहुत ही होशियार लड़की थी। दसवीं कक्षा में उसने 93 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। उसके बाद 12वीं में भी अच्छे अंक प्राप्त किए।

उसे एमबीबीएस में एडमिशन मिल नहीं सका। परंतु उसे बीएएमएस में एडमिशन मिल गया। अब वह डॉक्टर बन गई। उसका छोटा भाई आकाश इंजीनियर बनना चाहता था। लेकिन उसकी बहन, पिता और पड़ोसी की मार्गदर्शन से वह भी डॉक्टर बन गया।

संध्या की प्रेरणा सिर्फ भाई को ही नहीं मिली बल्कि अपने गली में रहने वाले कई विद्यार्थियों को भी मिली। भाई का क्लासमेट सचिन भी डॉक्टर बन गया। उसके बाद गली में रहने वाले उनके रिश्तेदार के लड़के ओमकार और प्रज्वल भी अब डॉक्टर बन रहे है। आज संध्या जिस गली में रहती है, उसी गली में पांच डॉक्टर बन गए।

आने वाले कई साल में संध्या की प्रेरणा लेते हुए कई डॉक्टर बन जाएंगे। बच्चे सदैव बड़ों का अनुकरण करते हैं। इसीलिए बड़ों की तरफ से छोटे बच्चों को अच्छी प्रेरणा देने की जरूरत है। इसीलिए बड़ों के सोच विचार सदा अच्छे ही होने चाहिए।

आनंदा आसवले, मुंबई
पत्ता: साईभक्ती चाल, रूम नं. 1, आनंद नगर, अप्पा पाड़ा,

कुरार विलेज, मालाड (पूर्व) मुंबई-400097

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