नाम मुहब्बत रखा गया

नाम मुहब्बत रखा गया

दुनिया को इस तरह से सलामत रखा गया
दो दिल मिले तो नाम मुहब्बत रखा गया

गर वक़्त साथ दे तो बुलंदी पे हैं सभी
रूठा अगर तो नाम कयामत रखा गया

फैलाया हाथ हमने किसी के न सामने
ख़ुद्दारियों को सारी अलामत रखा गया

सब कुछ लुटाया उसने हमारे ही वास्ते
माँ का भी नाम इसलिए जन्नत रखा गया

पहचान हमको ग़ज़लों से यारा मिली कहाँ
शाइर नहीं ये तर्के -हक़ीक़त रखा गया

लिखदी ग़ज़ल है आज ये मीना ने ख़ून से
उनवान ख़ूब इसका भी उल्फ़त रखा गया

Meena Bhatta

कवियत्री: मीना भट्ट सि‌द्धार्थ

( जबलपुर )

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • राधा कान्हा के द्वार | Radha Kanha ke Dwaar

    राधा कान्हा के द्वार ( Radha kanha ke dwaar )    फिर से  खड़ी  हुई  है  राधा  आ कान्हा के द्वार । माँग  रही है  उससे  अपने , सारे  ही  अधिकार ।। वापस करे कन्हैय्या गोकुल से चोरी की खुशियाँ और चुकाए  वृन्दावन का, पिछला  सभी उधार ।। महका रचा बसा खुशबू सा फिर भी…

  • प्रकृति का अद्भुत श्रृंगार

    प्रकृति का अद्भुत श्रृंगार ( 2222 2222 222 )निर्मल गंगा सी धारा तुम बहती होशबनम के मोती जैसी तुम लगती हो चंद्रप्रभा रातों की सुंदरता में तुमआँचल बन कर फैली नभ में दिखती हो यूँ लगता है जैसे ऊँचे परबत सेकल-कल करती झरने जैसी बहती हो फूलों की कोमल पंखुड़ियों के जैसेभँवरे की प्रीती की…

  • वो चाहें हो कुछ हंगामा | Vo Chahe

    वो चाहें हो कुछ हंगामा ( Vo chahe ho kuch hungama )   वो चाहें हो कुछ हंगामा, बन जाए कोइ फसाद नया ! इस पावन भू में फैल सके, कोई हिंसक उन्माद नया !! मतलब की बातों के बदले, मुद्दे बेमतलब उठा रहे अपनी ही बनाई बातों पर,करने लगते प्रतिवाद नया !! कहते खुद…

  • मेरे ख़ुलूस को | Mere Khuloos ko

    मेरे ख़ुलूस को मेरे ख़ुलूस को चाहो अगर हवा देनामेरे ख़िलाफ़ कोई वाक्या सुना देना कभी तो आके मेरी ख़्वाहिशें जगा देनावफ़ा शियार हूँ तुम भी मुझे वफ़ा देना तमाम उम्र ये मंज़र रहेगा आँखों मेंनज़र मिलाते ही तेरा ये मुस्कुरा देना जिधर भी देखिए रुसवाइयों के पहरे हैंमेरे ख़ुतूत मेरे साथ ही जला देना…

  • चालाकियां चलता रहा

    चालाकियां चलता रहा ( ग़ज़ल : दो काफ़ियों में ) मुफ़लिसी से मेरी यूँ चालाकियाँ चलता रहाज़हनो-दिल में वो मेरे ख़ुद्दारियाँ भरता रहा मैं करम के वास्ते करता था जिससे मिन्नतेंवो मेरी तक़दीर में दुश्वारियाँ लिखता रहा मोतियों के शहर में था तो मेरा भी कारवाँफिर भला क्यों रेत से मैं सीपियाँ चुनता रहा कहने…

  • घर की अदला-बदली करके सियासत करने वालों से

    घर की अदला-बदली करके सियासत करने वालों से जनता ही लेगी हिसाब, बग़ावत करने वालों से,घर की अदला-बदली करके सियासत करने वालों से। टूटी फूटी, नाली सड़कें, गुस्से में है बच्चा बच्चा,एक महफ़िल ही नाराज़ नहीं, सदारत करने वालों से। कल तक जिनको गाली दी थी कैसे आंख मिलाओगे,पूछ रहा हूं, मैं भी आज, हिमायत…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *